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ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका सम्मान से सम्मानित हैं। तमाम लोग चाहे उन्हें उगाहीबाज़ी के आरोप में तिहाड़ की हवा खाने वाले संपादक बतौर जानते हों, लेकिन इसमें शक़ नहीं कि वे कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके अनुभवी पत्रकार हैं। उनकी गणना देश के शीर्ष ”राष्ट्रवादी’ पत्रकारों में होती है जो आये दिन पाकिस्तान और आतंकियों से मोर्चा लेता रहता है। देश के लिए उनकी जान को क़ीमती मानते हुए मोदी सरकार ने उनकी हिफाज़त के लिए वाई श्रेणी की सुरक्षा  भी मुहैया कराई है।

वे मोदी जी के प्रशंसक हैं और यह उनका अधिकार है। लेकिन कई बार मोदी सरकार की कल्पना से भी आगे पहुँज चाते हैं। उनका अतिउत्साह बार-बार उन्हें झुट्ठे पत्रकारों की श्रेणी में पहुँचा देता है। इस काम में उनका कार्यक्रम DNA ख़ासा मशहूर हो चुका है। इसकी ताज़ा मिसाल है नये 2000 रुपयों में किसी ऐसी चिप के लगे होने की बात जिससे उसे सैटेलाइट के ज़रिये ट्रैक किया जा सकता है। इस अफ़वाह को फैलाने में सुधीर चौधरी की क्या भूमिका रही है, यह इस वीडियो से साफ़ है। सच्चाई यह है कि इस नोट में ऐसी कोई चिप नहीं है जिससे किरणें फूटेंगी और 120 गहरे गड्ढे में छिपाने के बावजूद जिन्हें ट्रैक कर लिया जाएगा। यह वीडियो ऐतिहासिक है और अगर टेक्नोलॉजी ने साथ दिया तो रहती दुनिया तक भारतीय पत्रकारिता के बिकाऊ और अफ़वाहू होने की नज़ीर बतौर इसे बार-बार देखा जाएगा।

फ़िलहाल तो आप देखें !

https://www.youtube.com/watch?v=2Yggr1_LnpQ

--- ये खबर वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है वायरल इन इंडिया न्यूज़ पोर्टल के लिए

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