शाहजहाँ ने नहीं कटवाए थे किसी मजदूर के हाथ, ऐसी ही कुछ अफवाहों का सच जानिए

ताजमहल को लेकर आजकल भारत में नया ही विवाद शुरू हो गया है | इस मामले को बहुत ज्यादा मजहबी रंग देने की कोशिश की जा रही है | खैर इसे छोड़ते हुए हम आपको बताते हैं कि ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है | शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में इसे तामीर कराया था | ये ईमारत प्यार और खूबसूरत इमारतों का गजब का नमूना है|

आज हम आपको ताजमहल के बारे में ऐसे ही स्थापित मिथकों के बारे में बताने जा रहे हैं जो जानकर आप एकबार में तो इन पर यकीन नहीं कर पाएंगे लेकिन सत्य असल में यही है |

ताज को बनने से भूतों ने रोका

ऐसा सुनने में मिलता है और ऐसी लोकश्रुति है कि जब ताजमहल बन रहा था तो कुछ भूत और जिन इसको बनने से रोकने में लगे हुए थे जो इसे बनने नहीं देना चाहते थे लेकिन इस मामले में ASI के अधिकारियों का कहना है कि भूतों या जिनों ने ताजमहल की नीव को ध्वस्त किया या करने की कोशिश की ऐसे कोई सबूत आजतक नहीं मिले न इस बात का कहीं इतिहास में जिक्र है तो ये भूतों वाली बात पूरी तरह से गलत है |

ताजमहल में दफ़न नहीं हैं मुमताज

मुमताज महल की मौत के बारे में ऐसा कहा जाता है कि 17 जून 1631 में मुमताज का इंतकाल हुआ था और उनके इंतकाल के बाद सबसे पहले उनका मृत शरीर बुहारनपुर में दफनाया गया था और फिर निर्माणाधीन ताजमहल में और इसके 22 साल बाद ताज में मुख्य स्मारक में मुमताज के शरीर को दफन किया गया लेकिन इस बारे में जब ASI ने जांच की तो उनका कहना है कि ताजमहल में मुमताज की ममी के दफ़न होने के कोई सबूत नहीं मिलते अतः ये भी एक अफवाह मात्र है |

सपने में बना था ताज का डिजायन

ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल को बनाने के लिए जो डिजायन तैयार हुआ था उसे सपने में देखकर बनाया गया था लेकिन इस संदर्भ में दुनियाभर के इतिहासकार इस बात पर एकमत होते हैं कि इसके डिजायन को तैयार करने में पूरी दुनिया के जानेमाने वास्तुशास्त्रों की मदद ली गयी थी लेकिन इसका फाइनल डिजायन किसने बनाया उसका कुछ पता नहीं चलता |

काला ताजमहल बनाना चाहते थे शाहजहाँ

लोग ये भी कहते हैं कि शाहजहाँ पहले सफ़ेद नहीं बल्कि काला ताजमहाल बनाना चाहते थे लेकिन इस बारे में ASI कहता है कि काले ताजमहल का कोई अस्तित्व कहीं नहीं था और न इसका कोई सबूत है | उनके मुताबिक 1910 में गाइडों ने इस बारे में झूठी कहानी फैलाई |

शाहजहाँ ने कटवाए थे 20 हजार मजदूरों के हाथ

ताजमहल के बारे में ये सबसे ज्यादा फैला हुआ मिथक है कि शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाने के बाद उसके सारे कारीगरों और मजदूरों के हाथ कटवा लिए थे लेकिन ये सिर्फ एक मिथक या अफवाह ही है | इतिहासकार इस बारे में कहते हैं कि शाहजहाँ ने किसी भी मजदूर के हाथ नहीं कटवाए थे | शाहजहाँ ने काम करने वाले मजदूरों से जीवन भर काम न करने का वचन लिया था और इसके बदले उन मजदूरों को जीवन भर वेतन दी गयी थी |

शाहजहाँ और मुमताज की कब्र पर पानी टपकता है

ये अफवाह भी आपने खूब सुनी होगी कि ताजमहल में दोनों कब्रों पर ऊपर से एक पानी बूँद लगातार टपकती है और ये कहाँ से टपकती है उसका पता दुनिया भर के वैज्ञानिक नहीं लगा पाए लेकिन सच ये है कि ताज के अंदर दोनों की कब्रें अंडरग्राउंड है और जब उर्स का मौका होता है तो यहाँ पर भीड़ बहुत होती  है जिसकी वजह से हवा नहीं आती अंदर तो आद्रता में बढ़ोत्तरी हो जाती है जिससे दीवारों पर बूँदें जम जाती है जो भीड़ जाने के बाद गायब हो जाती हैं |

इसके शिव मंदिर होने पर भी बवाल होता है जैसा अभी हो रहा लेकिन इस मामले में आगरा फोर्ट को बताते हुए ASI ने जवाब दिया है कि ताज का निर्माण शाहजहाँ ने ही कराया है | ये एक हिन्दू मंदिर था या है इसके कोई सबूत मौजूद नहीं है |

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