शिवराज सिंह को झटका देने की तैयारी में भाजपा, विजयवर्गीय होंगें सीएम उम्मीदवार, पढ़ें

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मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव काफी करीब है. यहां भाजपा की हालत पहले से हीं खस्ता है. विभिन्न सर्वे और ओपिनियन पोल बड़े अंतर से कांग्रेस की वापसी का अनुमान लगा रहे हैं. जबकि भाजपा में अंदरखाने नेतृत्व को लेकर बवाल मचा हुआ है.

आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा नेतृत्व इस बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विराम देकर कैलाश विजयवर्गीय को सीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट कर सकती है.

1. सत्ता विरोधी लहर से पार पाने की कवायद

मध्य प्रदेश में जिस तरह से जबर्दस्त सत्ता विरोधी रुझान है और उपर से कांग्रेस ने तपे तपाए सियासी धुरंधर कमलनाथ को प्रदेश में पार्टी की कमान सौंपी है, उससे भाजपा में हड़कंप मचा हुआ है. खास तौर पर कमलनाथ ने जिस तरह से कांग्रेस के लिए मोर्चा संभाला है और भाजपा की किलेबंदी की है, उससे भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व असहज हो गया है.

भाजपा की बेचैनी देखकर समझा जा सकता है कि वो किस तरह से कमलनाथ से डरी हुई है. मध्य प्रदेश में कमलनाथ की छवि विकास पुरुष की है जबकि शिवराज सिंह चौहान की छवि शवराज सिंह की बन गई है. जनता में शिवराज सिंह के प्रति काफी आक्रोश है, यही प्रमुख वजह है कि भाजपा यहां कैलाश विजयवर्गीय को आगे कर चुनाव में जाना चाहती है.

कैलाश जुटे हैं लॉबिंग में

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बीच पहले से हीं संबंधों में खटास आ चुका है. मध्य प्रदेश में हर उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत का संदेश विजयवर्गीय नेतृत्व को पहुंचाते रहे हैं. उन्होंने पार्टी को आगाह कर दिया है कि आगे शिवराज को आगे कर चुनाव लड़ा गया तो पार्टी का बुरा हश्र होना तय है.

विजयवर्गीय ने पार्टी को रतलाम झाबुआ लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और कोलारस विधानसीा उपचुनाव के नतीजों की पूरी रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें ये बताया गया कि इन सीटों को जीतने के लिए सीएम समेत पूरी कैबिनेट गांव गलियों की खाक छानती रही और सभी पर कांग्रेस का परचम लहरा गया.

3. आरएसएस भी विजयवर्गीय के पक्ष में

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आरएसएस ने आंतरिक सर्वे किए तो नतीजे उनके लिए चौंकाने वाले थें. यहां कांग्रेस दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंचती हुई दिखाई दे रही है. इसके पीछे तेजी से अलोकप्रिय होते शिवराज सिंह हैं. किसानों पर गोली चलवाने की घटना के बाद उनका ग्राफ तेजी से गिरा है. मध्य प्रदेश के लिए संघ की पहली पंसद भी विजयवर्गीय हीं हैं.

निष्कर्ष : भाजपा में बेचैनी है. खलबली है. जनता के आक्रोश से डरी हुई है. किसानों की हत्या कराने के समय ये बात उन्हें सोचनी चाहिए थी. नेतृत्व बदलने से क्या होगा. मध्य प्रदेश की जनता इस बार परिवर्तन के मूड में है.


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