बाबरी मस्जिद विवाद में कागज़ी कमी के कारण आया नया मोड़…

शेयर करें

धर्म के नाम पर सबसे बड़ी हिंसा और सबसे बड़ी राजनीती करने की मिसाल अगर किसी को दी जा सकती है तो वो राम मंदिर व बाबरी मस्जिद का मामला है। 90 के दशक से चल रहे इस विवाद को अब तक न्यायालय भी पूरी तरह से नहीं सुलझा पाया है। तो नहीं इतने लंबे समय लोगों ने इस मुद्दे को लेकर तरह तरह के बयान दे दिए हैं। कहीं जमीन के बंटवारे की बात कही जा रही है तो कहीं मदिर व मस्जिद बनाने का अलग बयान दिया जा रहा है।

इलाहबाद हाईकोर्ट भी कर चुका सुनवाई

इन सबके बीच ये तो साफ है कि जितने समय से यह मामला कोर्ट में लंबित है उतने समय से देश के राजनेताओं को इसके जरीये अपनी राजनीति रोटी सेकने का भी मौका मिला है। इलाहबाद हाई कोर्ट के साल 2010 का फैसला जिसमें विवादित जमीन का बंटवारा कर इसे तीनों समुदायों – सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांटने की बात कही थी।

फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका

इलाहबाद कोर्ट का फैसला आने के बाद इसके खिलाफ हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। दूसरी तरफ सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने भी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अर्जी लगाई थी।

 

सुप्रीम कोर्ट में मामले की आखिरी सुनवाई शुरु

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई की जा रही है। इस बीच कोर्ट ने एक बड़ी बात कही है, कोर्ट का कहना है कि, यह मामला जमीन विवाद का है और इसमें पहले हम मुख्य पक्ष को सुनेंगे। बता दें कि इस मामले में सबसे बड़ी बाधा थी कागजी कार्यवाही का पूरा नहीं होना, जो अब पूरी हो चुकी है।

जरुरी कागजातों का अनुवाद न होने के वजह से टली थी सुनवाई

इस मामले से जुड़े हजारों पन्नों का अंग्रेजी भाषा में मौजूदव ने होने की वजह से कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले पर पांच दिसंबर से सुनवाई करने का फैसला किया था। अब अनुवाद का मामला निपट चुका है तो सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई शुरु हो गई है।

संवेदनशील मामले को लेकर कहा जा रहा है कि, 30 दिन की कार्यवाही में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो सकती है। कोर्ट ने सुनवाई शुरू करते हुए कहा कि इस दौरान एक पक्ष ने कागजातों की कमी का हवाला दिया जिसके बाद कोर्ट ने इस केस की सुनवाई 14 मार्च तक स्थगित करते हुए कहा कि पहले पूरे कागजात तैयार कर लिए जाएं।

Story Source : http://www.theakhbaar.in/babri-masjid-vivaad-me-kagzi-kami-ke-karan-aya-naya-mod-14-ko-hi-agli-sunwai/


शेयर करें

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े