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ब्रिटेन के लंदन के एक स्कूल ने सरकार से बच्चों के हिजाब पहनने और रमजान के दौरान रोजा रखने पर रोक लगाने की मांग की है। स्कूल की मांग है कि 11 सितंबर 2018 से 11 साल तक की लड़कियों के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। साथ ही स्कूल की मांग ये भी है कि रमजान के दौरान रोजे रखने पर भी बैन लगाया जाए।

पहले भी लिया जा चुका है ऐसा कदम

आपको बता दें कि इस स्कूल में ज्यादातर छात्र भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश मूल के बच्चे पढ़ते हैं। जिनमें मुसलमान छात्रों की तादाद भी खासा अच्छी है।

गौरतलब है कि पूर्वी लंदन के न्यूहैम स्थित सेंट स्टीफेंस ने 2016 में आठ साल तक की लड़कियों के हिजाब पर बैन लगाने के साथ देश का पहला स्कूल बन गया था।

लेकिन अब इस स्कूल ने सितंबर 2018 में 11 साल तक की लड़कियों के हिजाब पहनने पर बैन लगाने की मांग की है। इसके साथ ही स्कूल ने रमजान के दौरान स्कूल परिसर में रोजा रखने पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

भारतीय मूल की हैं स्कूल प्रिंसिपल

आपको बता दें कि इस स्कूल की प्रिंसिपल भारतीय मूल की नीना लाल हैं। जिन्होंने मांग की है कि सरकार साफ दिशा-निर्देश जारी करें है, ताकि इस मुद्दे पर अभिभावकों के साथ विवाद न हो।

स्कूल के गवर्नर्स के चेयरमैन आरिफ का कहना है कि हम रोजा पर बैन नहीं लगाना चाहते, बल्कि हम ये चाहते है कि बच्चे छुट्टी वाले दिन रोजा रखे।

इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और सेहत की जिम्मेदारी स्कूल की ही होती है। उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले का कुछ पेरेंट्स ने विरोध किया है, लेकिन अधिकतर इस फैसले से खुश नजर आए हैं।

यूके शिक्षा विभाग के अनुसार उनकी शैक्षणिक नीतियां अलग नहीं हैं वो सभी के लिए एक ही हैं। शिक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा है कि हमने यूनिफॉर्म को लेकर स्कूल को गाइडलाइंस जारी कर दी है और कहा है कि स्कूल को समानता एक्ट के तहत कानून कर्तव्यों को समझना चाहिए।

इस्लामिक संस्थान ने जताई आपत्ति

स्कूल के इस कदम पर विश्व विख्यात इस्लामिक संस्थान दारुल उलूम देवबंद के उलेमाओं ने आपत्ति जताई है।

तंजीम उलेमा ए हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना नदीम उल वाजिदी ने कहा है कि इस पाबंदी से परेशान होने की जरुरत नहीं है। इस वक्त पुरी दुनिया मे मुस्लिम विरोधी लहर है, ये उसी का नतीजा है।

हिजाब पहनना या रोजा रखना या नमाज पढ़ना एक इंसान का मानवीय अधिकार है। इसका ताल्लुक मजहबी अधिकार से है। किसी स्कूल या किसी इदारे में इस पर पाबंदी लगाना समझ में नहीं आता।

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