ज्ञान- कुछ ऐसे भी देश हैं जहाँ सूरज नहीं उगता लेकिन फिर भी रमजान रखा जाता है, लेकिन कैसे ?

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दुनियाभर में इस्लाम के सबसे पाक दिन रमजान को बेहद खास माना जाता है। रमजानों के दिनों में रोजा रखने वाले सुबह जल्दी उठकर पानी पीने और खाने से लेकर शाम के सूर्यास्त के आखिरी पलों में हाथ में खजूर लेकर प्रार्थना करने करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका क्या महत्व होता है?  मुसलमान रोजा क्यों रखते हैं और रमज़ान क्या होता है? रमज़ान से जुड़े कई ऐसे सवालों का हम आपको जवाब देने जा रहे हैं।

क्या है इस्लाम में रमजानों का महत्व?

दुनियाभर में मुसलमानों के लिए रमज़ान सबसे पवित्र दिन होते हैं। माना जाता है कि यह वो महीना होता है, जब इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान, मुहम्मद पैगंबर के सामने प्रकट हुई थी।

रमजान इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक नौवां महीना है, ये कैलेंडर चांद की स्थिति  के आधार पर चलता है। हिजरी कैलेंडर की शुरुआत 622 ई. में हुई थी, जब पैगंबर मुहम्मद मक्का से मदीना गए थे।

कब आते हैं रमजान?

चंद्रमा या हिलाल के दिखने के आधार पर यह 17 मई की शाम से शुरू हुआ, जिसका मतलब है कि मुसलमान 18 मई की सुबह से रोजा रखना शुरू करेंगे।

मुस्लिम क्यों रखते हैं रोजा?

रमजान के महीने में  मुस्लिम दिन की रोशनी के घंटों के समय कुछ खाते-पीते नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रोज़ा इस्लाम के पांच स्तंभों में एक है।

इबादत के लिए, शाहादत- जो इस्लाम में विश्वास करने का एक जरीया है, सलात- पांच दैनिक प्रार्थनाएं, जकात या भोज और हज, मक्का की तीर्थ यात्रा।

रमजान में रोजा मुसलमानों के लिए जरुरी माना जाता है और कुरान में कहा गया है कि:

हे तुम जो रोज़ा करते हो! रोज़ा तुम्हारे लिए निर्धारित किया गया है जैसे यह उन तुमसे पहले आए लोगों के लिए निर्धारित किया गया था, ताकि तुम ताक्वा [ईश्वर-चेतना] प्राप्त कर सको।

अरबी में रोज़ा का मतलब होता है “खुद को रोकना”

खुद को न सिर्फ भोजन, पेय और सेक्स से दूर रखना बल्कि धूम्रपान दूसरों के बारे में गलत बात करना या गलत भाषा का इस्तेमाल करने से भी खुद को रोकना होता है।

रोजा रखना स्वास्थ्य के लिए है ठीक?

मुस्लिम रोजा के दौरान सुबह होने से पहले ही खा लेते हैं और हर दिन में सूर्यास्त होने के बाद अपना रोजा खोलते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस पर कहा है कि रोजे की छोटी अवधि – यदि सही तरह से नियंत्रित की जाए तो स्वास्थ्य को भी लाभ हो सकते हैं, साथ ही संभावित रूप से अधिक वजन वाले लोगों के लिए भी यह फायदेमंद हो सकते हैं।

रोज़े के दौरान, शरीर में ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है और फिर फैट को जलाने लगता है, जो कि वजन घटाने का अहम कारण है।

वहीं आप कई दिनों या हफ्तों तक रोजे के साथ, शरीर में एनर्जी के लिए प्रोटीन का इस्तेमाल करते हैं।

रोजा को लेकर ये हैं खास मान्यताएं

मुसलमानों की अपनी संस्कृति के आधार पर पूरी दुनिया में रमजान रीति-रिवाज इस्लामी परंपराओं के अंजर्गत आता है।

सूर्योदय से पहले भोजन करना और पानी पीना

सूर्यास्त के बाद जो इफ्तार के समय होता है तभी भोजन करना

रोजा खजूर और पानी के साथ तोड़ना

बिना सूर्यास्त वाली जगहों पर मुस्लिम कैसे रखते हैं रोज़ा?

जूनू, अलास्का में मुसलमान कैसे रोज़ा रखते होंगे आपने कभी सोचा है? सूर्य आर्कटिक सर्किल में मध्यरात्रि में ही नजर आता है और उत्तरी फिनलैंड में, यह गर्मी के दौरान 60 दिनों तक बिल्कुल भी नहीं आता।

इसलिए किसी अन्य देश की अधिक उचित सुबह और सूर्यास्त के समय का पालन करने की अनुमति होती है।

इस्लामिक सेंटर ऑफ नॉर्थ नॉर्वे ने इस्लामिक कानून या मुस्लिम न्यायिक प्राधिकरण के द्वारा एक सत्तारूढ़ जारी किया – जो स्थानीय मुसलमानों को मक्का के घंटों के मुताबिक चलने की इजाजत देता है, जब नॉर्वे में उपवास दिन 20 घंटे से अधिक हो जाता है।

अमेरिका के मुस्लिम न्यायविदों की असेंबली ने इसी तरह का फैसला किया है कि अलास्का के सबसे पूर्वोत्तर इलाकों में रहने वाले मुसलमान देश के दूसरे हिस्से के सुबह और सूर्यास्त के समय का उपयोग कर सकते हैं, जहां “दिन रात से अलग है”।


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