अभी अभी- मुसलमानों की देश में बड़ी जीत, उत्साह से झूम उठा पूरा देश

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जैसा सभी जानते हैं कि इन दिनों पुरे देशभर की निग़ाहे कर्नाटक चुनावों पर ही आकर टिक गई है.

चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने से त्रिशंकु बन गया है.

जिसमें बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो वहीं कांग्रेस को 78 व जेडीएस को 38 सीटे मिली हैं. और अन्य के खाते में महज 2 सीटे गई है.

कर्नाटक विधानसभा में मुस्लिम उम्मीदवारों की घटी संख्या

ऐसे में इसी के साथ ये भी साबित हो गया हैं कि इस बार की नई कर्नाटक विधानसभा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पिछली विधानसभा के मुकाबले छोटा रहेगा.

क्योंकि मंगलवार को हुई मतगणना के बाद राज्य में केवल सात मुस्लिम उम्मीदवार ही अपनी जीत हासिल कर पाए है.

जबकि अगर साल 2013 के विधानसभा चुनावों की बात करे तो उसमें मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 11 थी.

लेकिन इस बार नई विधानसभा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व काफी ज्यादा फिसल गया है.

मुस्लिम संख्या 11 से खिसक कर पहुची 7 

जिसका सीधा-सीधा फ़ायदा बीजेपी उम्मदीवारों को 40 सीटों से बढ़कर 104 सीटों के साथ मिला नज़र आ रहा है.

हालांकि, हर मुमकिन कोशिश के बाद भी भगवा पार्टी 224 सीटों में से 113 सीटों के साधारण बहुमत से कम ही जीत दर्ज करा सकी.

जानकारी के लिए बता दें कि मुस्लिम उम्मीदवारों में कांग्रेस के अनुभवी रोशन बेग और महिला उम्मीदवार कनीज फातिमा शामिल है.

कांग्रेस उम्मीदवार बेग अपने गढ़ शिवाजीनगर से जीते हैं जबकि फातिमा गुलबर्गा उत्तर कर्नाटक से जीत पाने में कामियाब रही.

सभी 7 मुस्लिम उम्मीदवार ने कांग्रेस के टिकट पर जीता चुनाव

सभी 7 मुस्लिम उम्मीदवारों ने भाजपा उम्मीदवारों को करारी हार देते हुए ये चुनाव जीता है.

सबसे ज्यादा ख़ास बात ये हैं कि सभी सात जीतने वाले मुस्लिम उम्मीदवार केवल कांग्रेस से ही हैं जिनमें से पांच ने पार्टी टिकट पर 2013 का भी विधानसभा चुनाव जीता था.

दूसरी तरफ, पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य में अपनी स्थिति अभी भी बनाए रखी है.

क्योंकि पिछली बार उसने 40 सीटें जीती थीं और इस चुनाव में उसने महज 3 सीटों के नुक्सान के साथ 37 सीटें जीती हैं.

दुसरे समुदाय के नौ अन्य उम्मीदवारों का भी चुनाव में दिखा दम

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सात मुस्लिम विजेताओं के अलावा, इस चुनाव में दुसरे समुदाय के नौ अन्य उम्मीदवार नंबर 2 पर रहे हैं.

जिसमें जीत दर्ज कराने वालों में यू.टी.कादर-मैंगलोर, तनवीर सेठ-नरसिम्हाराज, एन ए हरिस-शांति नगर, आर रोशन बेग-शिवाजीनगर, रहीम खान-बीदर , बीजेड जमीर अहमद खान-चामराजपेट और कनीज़ फातिमा- गुलबर्गा उत्तर से शामिल हैं.

समुदाय के नौ उम्मीदवार जो 2 नंबर पर रहे हैं उनमें फ़िरोज़ नूरुद्दीन सेठ-बेलगाम उत्तर, अब्दुल हमीद मुश्रीफ-बीजापुर सिटी, इकबाल अंसारी-गंगावती, मोहम्मद इस्लाम तमटगार-हुबली-धारवाड़ पश्चिम, सय्यद जमीर पाशा-कोलार, बी.ए.मोहिउद्दीन बावा-मैंगलोर सिटी उत्तर, सय्यद यासीन-रायचूर, इकबाल हुसैन-रामनगरम तथा सय्यद अज़ीमपीर कादरी शिगगांव है, ये सभी उम्मीदवार भी कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कराने में कामियाब रहे है.

निष्कर्ष


मुस्लिम उम्मीदवारों पर ध्यान दे तो ये बात साफ़ तौर पर सामने आती हैं कि कांग्रेस के अलावा दूसरी पार्टियों ने मुस्लिम उम्मीदवार पर अपना विश्वास ज्यादा ख़ास नहीं दिखाया है. लेकिन बेहद हैरानी की बात हैं कि कांग्रेस ने जिन भी मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा उनमे से लगभग सभी जीत दर्ज कराने में कामियाब रहे.


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