इतिहास — राईट ब्रदर ने नहीं, इस मुस्लिम व्यक्ति ने किया था हवाई जहाज़ का आविष्कार - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

इतिहास — राईट ब्रदर ने नहीं, इस मुस्लिम व्यक्ति ने किया था हवाई जहाज़ का आविष्कार

हर किसी की ख्वाहिश होती है कि वो एक बार विमान में यात्रा जरूर करें। विमान से यात्रा करने सपना कौन नहीं देखता लेकिन एक शख्स ऐसा भी रहा है जिसने चिड़ियों की तरह उड़ने की कोशिश की है।

हवा में उड़ा था एक शख्स

आपको बता दें कि ये वाकया किसी तरह की कहानी का नहीं बल्कि एक दम सच है। अगर आप लोगों में से कोई ये कहे कि मैंने आज एक इन्सान को हवा में उड़ते हुए देखा है तो शायद आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। लेकिन एक ऐसा शख्स था जिसने ये कारनामा कर के दिखाया है।

हालांकि हो सकता है कि आपको इस बात पर यकीन न हो लेकिन ये एक दम सौ फीसदी सच है। और यही वो इंसान है जिसने सबसे पहला हवाई जहाज बनाया था।

गौरतलब है कि हमें स्कूलों में ये पढ़ाया जाता रहा है की हवाई जहाज का अविष्कार राइट ब्रदर्स ने ‘लियनएर्डो दा विन्सी’ की मॉडेल से प्रेरणा ले कर किया था लेकिन ये कभी नहीं बताया जाता है की ‘लियनएर्डो दा विन्सी’ के 600 साल पहले एक मुसलिम वैज्ञानिक ने ना सिर्फ हवाई जहाज का मॉडेल बनाया था बल्कि उसे खुद ने सफलतापूर्वक टेस्ट भी किया था।

अब्बास इब्न फिरनास ने बनाया

ये कोई कहानी नहीं है बल्कि एक दम सच्ची घटना है। इस मुस्लिम वैज्ञानिक का नाम ‘अब्बास इब्न फिरनास’ है। जिनका जन्म 810 ई मे स्पेन मे हुआ था। अब्बास एक इंजिनियर, अविष्कारक, विमान-चालक, चिकित्सक और अरबी भाषा के कवि भी थे।

आपको बता दें कि इतिहासकार फिलिप हिती की एक किताब अरब के इतिहास के अनुसार, आकाश में उड़ान भरने के इतिहास में पहले वैज्ञानिक अब्बास इब्न फिरनास ही थे।

इस किताब में ये भी कहा गया है कि विमान के अविष्कारक विल्बर राईट और ओर्विल्ले राईट कहे जाते रहे है। लेकिन इन दोनों से पहले ही अब्बास ने आकाश में उड़ने की कोशिश की थी।

65 साल में किया था ये कारनामा

अब्बास ने ये कोशिश एक ग्लाईडर को लेकर की थी। ऐसा कहा जाता है कि फिरनास द्वारा किया गया वो प्रयास सफल रहा था।

875 ईसवीं में फिरनास 65 साल का था तब उसने ये कारनामा किया था।

अब्बास इब्न फिरनास ने पक्षियो के उड़ने के बारे में अध्यन किया था और एक लकड़ी और रेशम के पंखो से बना एक पहनने लायक यंत्र बनाया था और मस्जिद की मीनार से उड़ान भरी थी।

जिसके बाद मे उसी के एक और मॉडेल ग्लाईडर को उन्होंने पहाड़ की चोटी से उड़ान भर कर टेस्ट किया था। इतिहासकार ने अपनी किताब में लिखा है कि देखने वालों ने बताया की ये उड़ान हर पक्षी से तेज थी।

आकाश में उड़ने का उसका ये प्रयास सफल रहा था और उसके आकाश से नीचे उतरने का कारनामा कई लोगो ने अपनी आंखों से उस समय देखा भी था।

जब वे धरती पर नीचे उतर रहे थे तो वो उस समय ठीक ढंग से उतर नही पाए थे और इससे वो घायल हो गए थे। गौरतलब है कि आज इसी इंसान की कोशिश की वजह से हम लोग आसमान में यात्रा कर पाते हैं और आसमान को भी चिरते हुए अब तो चांद और मंगल तक पहुंच गए है।

दिया जाता है सम्मान

इनके सम्मान में चांद पर पाए जाने वाले एक बड़े गड्ढे का नाम इब्न फिरनास क्रेटर रखा गया है। इब्न फिरनास के सम्मान में लीबिया सरकार ने भी डाक टिकट जारी किया है।

और इराक के बगदाद में एक आलिशान पुतला भी इनके सम्मान में लगावाया गया है। तो वहीं स्पेन में इब्न फरनास के नाम पर एक पुल भी बनाया गया है और दुबई के इब्न बतूता शॉपिंग मॉल में इब्न फरनास के कारनामों को पुतले की शकल दी गई है।

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