अचानक डोनाल्ड ट्रंप का “मुस्लिम प्रेम” क्यों उमड़ने लगा, वजह जानकर हो जायेंगे हैरान - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

अचानक डोनाल्ड ट्रंप का “मुस्लिम प्रेम” क्यों उमड़ने लगा, वजह जानकर हो जायेंगे हैरान

विश्व भर में मुसलमानों के खिलाफ अगर कोई नेता खुलकर बोलता है तो वो है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। मुसलमानों के खिलाफ हमेशा जहर उगलने वाले डोनाल्ड ट्रंप का अचानक से मुस्लिम प्रेम जाग जाने से सिर्फ इस्लामी जगत ही नहीं, बल्कि अमेरिका के लोग भी काफी हैरान हैं। गौरतलब है कि किसी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ट्रंप के अंदर इस कदर बदलाव देखा जाएगा।

हालांकि विशेषज्ञों ने इस बदलाव को शक की नजरों से देखा है। उनका कहना है कि ट्रंप के मुसलमानों के प्रति इतने प्रेम के पीछे स्वार्थ छिपा हुआ है। वो अपनी सत्ता बचाने और रूस के विवाद से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अपने रुख से अलग जा कर मुसलमानों के प्रति अपना प्रेम जताकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस की दखल की जांच कर रहे जेम्स कोमी को FBI डायरेक्टर पद से हटाकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरो को अहम खुफिया जानकारी देकर ट्रंप बुरी तरह से फंस चुके हैं। लेकिन अब वो सवालों से बचने के लिए ही विदेशी दौरों पर निकले हैं। दुनिया के 6 मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले डोनाल्ड ट्रंप के पास मुस्लिम नेताओं को साधने के सिवाय अब कोई और विकल्प बचा नहीं है।

मुस्लिम रिवाजों को भी समझ रहे

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सिर्फ मुस्लिम देश सऊदी अरब से अपने पहले विदेशी दौरे की शुरुआत की है, बल्कि ट्रंप ने वहां पहुंचकर मुस्लिम रीति-रिवाजों को समझने की बी कोशिश की है। ट्रंप अपनी बेटी और पत्नी के साथ सऊदी अरब गए।

रविवार को पहली ‘अरब इस्लामिक अमेरिकी समिट’ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ लड़ाई नहीं है, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच लड़ाई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों को इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए। इस समिट में पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत 55 मुस्लिम देशों के नेताओं ने शिरकत की थी।

एक झटके में तस्वीर बदली

ट्रंप की तरफ से मुस्लिम देशों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने और सीरिया पर हमले करने और अफगानिस्तान में सबसे बड़ा गैर परमाणु बम गिराने से मुस्लिम राष्ट्रों में जबरदस्त गुस्सा था, जिसको खत्म करने लिए ट्रंप ने सऊदी अरब में ‘अरब इस्लामिक अमेरिकी समिट’ मंच का इस्तेमाल किया है। वो अपने भाषण में मुसलमानों के प्रति हमदर्दी दिखाते हहुए नजर आए।

गौरतलब है कि जानकारों का कहना है कि ट्रंप ने अपनी मुस्लिम विरोधी छवि को एक झटके में बदलने की शानदार कोशिश की है। वो इस मामले में अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों को भी पीछे छोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। वैसे भी ट्रंप किसी भी काम को एक झटके में करने में विश्वास रखते हैं। ट्रंप ने बिना अनुभव के ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल की और फिर मुसलमानों के खिलाफ धड़ाधड़ फैसले किए थे।

पहली विदेश यात्रा को सफल बनाने की कठिन परीक्षा

ट्रंप के अमेरिका से रवाना होने के बाद से ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वो अपने पहले विदेशी दौरे को सफल बना पाएंगे? वो लगातार अमेरिका मीडिया के निशाने पर हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति अगर सफल होते हैं, तो निश्चित रूप से अमेरिका पहुंचने पर उनको विवादों से थोड़ी राहत मिलेगी। वर्ना वापस लौटने पर उनको अपने पद को बचाए रखने की चुनौती से भी जूझना होगा।

आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति अपने पहले विदेशी दौरे के लिए कनाडा या मैक्सिको जैसे पड़ोसी देशों का चुनाव करते हैं, लेकिन ट्रंप ने इससे हटकर यह फैसला लिया है। अमेरिकी मीडिया में यह भी कहा जा रहा है कि ट्रंप तीन धर्मों की तीर्थयात्रा में जा रहे हैं। सवाल ये है कि क्या इन तीर्थयात्राओं से उनकी समस्याएं कम होंगी।

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