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धर्म को लेकर वैसे तो मार्क्स ने यहाँ तक कहा है कि धर्म एक अफीम की तरह है लेकिन ये उसका अपना मत था जो उसके परिवेश के हिसाब से ठीक होगा पर भारत में धर्म को लेकर मान्यताएं कुछ और हैं !

यहाँ लोग धर्म या मजहब से बहुत जुडाव रखते हैं और उन्हें धर्म से जुडी हर एक चीज से लगाव है ! अगर हम बात करें दुनिया के सबसे पुराने हिन्दू धर्म की तो देखते हैं कि इसको मानने वाले इसकी बातों और श्रद्धाओं से बहुत लगाव और आत्मिक संबंध रखते हैं ! हिंदुत्व में ॐ का बहुत  महत्त्व है !

क्या है आखिर ॐ का महत्त्व

हिंदुत्व का मूल ही ॐ कहा जाता है ! ये ऐसा शब्द है जिसे आप हिंदुत्व की सारी पवित्र किताबों में देख सकते हैं ! इसका महत्त्व इसके इस्तेमाल के साथ वृहद होता जाता है ! इसका महत्त्व अगर जानना हो तो किसी हिन्दू धर्मावलम्बियों से पूंछो तब पता चलता है कि ॐ एक ऐसा शब्द है जो सकल ब्रहमांड में गुंजायमान है और इसे वो कंठ को पवित्र करने वाला भी कहते हैं !

ॐ के बारे में कहा जाता है कि इसे पुरात्तन समय से ऋषियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है और सभी वेदमंत्रों के पहले आता है ! ये सिर्फ प्रतीक ही नहीं बल्कि हिन्दुओ का सबसे पवित्र शब्द है ! कहते हैं इसमें इतना चमत्कार छुपा है जिसके उच्चारण से ही दवा से ज्यादा फायदा होता है !

विभिन्न मान्यताएं

इस शब्द की बनावट को लेकर कहा जाता है कि जो 3 जैसा आकार है वो ब्रह्मा और दाहिने ओर मुदा हुआ आकार विष्णू तथा दोनों के ऊपर बना चाँद सा चिन्ह शंकर भगवान् को दर्शाता है !

786 से क्या है संबंध

अब बात करते हैं कि इस ॐ शब्द का इस्लाम के पाक 786 से किस प्रकार संबंध है ! हम ये तो जानते ही हैं कि हर मुसलमान के लिए 786 उतना ही पवित्र है जितना हिन्दुओ के लिए ॐ ! मुस्लिम हर काम में इसका प्रयोग करना शुभ मानते हैं ! लेकिन क्या आप इसकी उतपत्ति कैसे हुई इस्लाम में वो जानते हैं ?

वैसे इस्लाम में इस अंक के आने को लेकर बहुत से मत है फिर भी कोई राय नहीं बना पाता लेकिन हम आपको बताने की कोशिस करते हैं ! कहते हैं कि 786 बिस्मिल्लाह से बना है जिस लफ्ज का मतलब होता है अल्लाह का नाम ! यदि ‘बिस्मिल्ला अल रहमान अल रहीम’ को अरबी या उर्दू भाषा में लिखा जाए और उन शब्दों को जोड़ा जाए तो उनका योग 786 आता है।

हिन्दू धर्म में भी इस अंक को शुभ माना जाता है ! और कारण है श्रीकृष्ण भगवान ! वो अपनी 7 छेदों वाली बांसुरी को अपनी 3 3 उँगलियों से बजाते थे जहाँ से इसका अर्थ उत्पन्न होता है ! बांसुरी के (7) सात छिद्रों से बने सात स्वरों को देवकी के आठवें (8) पुत्र प्रिय श्रीकृष्ण ने अपनी (6) अंगुलियों से बजाकर समस्त चराचर को मंत्रमुग्ध कर दिया था। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में भी खासतौर पर 786 अंक को प्रिय माना गया है।

Source-https://hindi.speakingtree.in/allslides/om-aur-786-ka-relation/289281

--- ये खबर वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है वायरल इन इंडिया न्यूज़ पोर्टल के लिए

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