तो इसलिए अज़ान की आवाज़ सुनते ही कुत्ते रोने लगते है !

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सालों से कुत्तों को मनुष्य के वर्षो पुराना साथी के रूप में ही देखें जाता रहा है, लेकिन जब मनुष्यों ने कुत्तों के कुछ ख़ास व्यवहार के प्रती अध्ययन किया है उसके सामने जो तथ्य आऐ उसने सबको हैरान कर दिया.

अज़ान के वक्त कुत्ते रोते है

अगर कभी गौर किया हो तो आपने पाया होगा कि अज़ान के वक्त कुत्ते रोने लगते है, लेकिन शायद ही कभी किसी ने इसके पीछे का कारण जानने की कोशिश की होगी कि आखिर अज़ान की आवाज़ सुनकर कुत्ते क्यों रोने लगते है.

ऐसे में आज हम आपको इसी रहस्य से जुड़े एक बेहद ख़ास बात बताएंगे जिसे सुनकर हर मुस्लिम दंग रह जाएंगा.

जानिए अज़ान के वक्त कुत्तों के रोने की बड़ी वजह !

दरअसल, नवजवान नाम के एक शख़्स ने गौर किया कि जैसे ही इलाके के मस्जिद से अज़ान की आव़ाज आती है तो अचानक ख़ामोश बैठे कुत्ते रोने लगते है.

इसका जवाब पाने के लिए उसने एक मुस्लिम बुजूर्ग से पूछा कि “आखिर वो क्या वजह है कि अकसर अज़ान की आवाज़ सुनते ही उस इलाक़े के कुत्ते ज़ोर-ज़ोर से रोने लगते है और अज़ान  खत्म होने से थोङा क़ब्ल या बाद ख़ामोश हो जाते हैं?”

आने वाली किसी आफ़त को पहले ही देख सकते है कुत्ते

बुज़ुर्ग ने इसका जवाब नवजवान को देते हुए बताया कि “देखो मियाँ, अल्लाह ताला ने जानवरों को एक ख़ास महसूस करने की शक्ति फ़रमाई है, जो कि इंसानों के पास नहीं है. जबकि इंसान सभी जीवो में सबसे ज्यादा बुद्धिमान है. बावजूद इसके वो आसमान से आने वाली आपदाओं और आफ़ात को अपनी सामान्य आँखों से नहीं देख पाता है.”

अपने तरीक़े से इंसानों को सचेत करते है कुत्ते

लेकिन यह बेजुबान जानवर उन्हें देख तो सकते हैं, मगर बेज़बान होने की वजह से उन आने वाली आपदाओं के बारे में इंसानों को नहीं बता सकते.

लिहाज़ा वो अपने तरीक़े से अपनी आवाज़ में इंसानों को उस बारे में बताने की कोशिश करते हैं.

अज़ान की आवाज़ से बुरी शक्तियाँ निकलकर भागने लगती है जिसे कुत्ते देख लेते है

इसलिए जैसे है शाम की अज़ान शुरू होती है, तो अज़ान की आवाज़ सुनते ही हमारे आस-पास मौजूद बुरी शक्तियाँ वहाँ से भागना शुरू हो जाती हैं जिन्हे देखते ही यह कुत्ते रोना शुरू कर देते हैंं.

कुत्ते रोकर इंसानों को आने वाली आफ़त के बारे में देते है चेतावनी

बुजूर्ग ने ये भी बताया कि “कुत्ता जब कहीं किसी इलाक़े में बहुत रोने लगता है और बराबर कई दिनों तक वो रोता है, तो ये देखा गया है कि कुछ ही दिनो में उस इलाक़े में किसी ना किसी की मौत हो जाती है. लोग ज्यादातर उस कुत्ते को ही मनहूस बताकर उसे वहां से मार कर भगा देते हैं. जबकि असल में वो बेज़बान बेचारा मनहूस नहीं होता बल्कि वो इशारों में उस इलाक़े मे आने वाली आफ़त के बारे में आगाज़ कर रहा होता है.”


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