अभी अभी- जारी हुए 10वि क्लास के परिणाम, कुछ हुए फ़ैल, तो कुछ ने रच दिया इतिहास

अहमदाबाद की रहने वाली 16 साल की आफरीन शेख ने माँ-बाप के साथ कर दिखाया अपने देश का नाम भी रोशन

किसी जमाने में बेटियों को अभिशाप मानने वाला हमारा पुरुष प्रधान समाज आज बेटियो के कारनामे से निहाल होकर उनका गुणगान करते नही थक रहा है .

आज से कुछ दशक पहले यह वही बेटियां है जिन्हें  पर्दे में रखने की प्रथा थी और घर की इज्जत आबरू बताकर उन्हें चौखट के बाहर कदम रखने की इजाजत तक नही मिलती थी.

लेकिन समय के साथ बड़ी मुश्किल से कई माँ बाप ने हिम्मत जुटाकर अपनी बेटियों को स्कूली शिक्षा के लिए घर से बाहर भेजना शुरू किया और समाज की मान्यता के विपरीत अपनी बेटियों को पढ़ने का अधिकार दिया.

ऑटोरिक्शा ड्राइवर की बेटी आफरीन शेख ने कर दिखाया कमाल


इसी के चलते अब हाल ही में गुजरात बोर्ड परीक्षा परिणामों में लड़कियों ने बाजी मारते हुए अपने माँ-बाप का नाम रोशन कर दिखाया है.

और इसी में से एक है गुजरात की रहने वाली आफरीन शेख जिसने गुजरात बोर्ड सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट (एसएससी)  की दसवी परीक्षा में 98.31 प्रतिशत अंक हासिल करते हुए हर किसी को हैरान कर दिया.

जी हाँ बता दें कि 16 साल की आफरीन शेख अहमदाबाद की रहने वाली हैं जिनके पिता एक ऑटोरिक्शा ड्राइवर हैं.

बेटी की सफलता पर परिवार में ख़ुशी की लहर


आफरीन बचपन से ही डॉक्टर बनाना चाहती हैं. रिजल्ट के बाद अफरीन ने कहा कि,

“परीक्षा के नतीजों से मैं बहुत खुश हूं. अब मैं साइंस स्ट्रीम में एडमिशन लेने की सोच रही हैं. मैं डॉक्टर बनाना चाहती हूं.”

ऐसे में बेटी की इस सफलता पर पूरा परिवार खुश है.

डॉक्टर बनना चाहती हैं आफरीन


अपनी इस सफलता पर आफरीन ने आगे कहा कि,

“मैं डॉक्टर बनाना चाहती हूं, क्योंकि जिस तरह से डॉक्टर लोगों की मदद करते हैं मैं भी ऐसा ही करना चाहती हूं. मेरे परिवार में किसी ने भी डॉक्टर को कैरियर नहीं चुना है, लेकिन अब मैं डॉक्टर बनूंगी.”

पेशे से ऑटो ड्राईवर पिता की माने तो परिवार की कम आय होने के बाद भी उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी.

उनका कहना है कि वो अब अपनी बेटी की आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ रहे हैं.

बेटी को और पढ़ाना चाहते हैं आफरीन के पिता


सीमित आय वाले आफरीन के पिता खेश मोहम्मद हमजा का कहना है कि,

“वो अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं. मैंने कभी भी लड़का और लड़की में फर्क नहीं किया।. मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे पढ़ाई करें.”

निष्कर्ष


गौरतलब है कि पिछले साल करीब 7 लाख स्टूडेंट्स ने जीएसईबी एसएससी की परीक्षा दी थी. इस बार भी लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है. इस बार कुल 68.24 फीसदी रिज़ल्ट है. इस साल कुल 11,03,674 स्टूडेंट परीक्षा में शामिल हुए थे. ऐसे में जब आफरीन जैसे बच्चे गरीब परिवार से आने  के बावजूद अपनी मेहनत से इतिहास रच रहे हैं तो जाहिर सी बात हैं माँ-बाप को  सबसे ज्यादा ख़ुशी होती ही है.

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Leesha Senior Reporter

यह खबर वायरल इन इंडिया के वरिष्ट पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है| खबर में कोई त्रुटी होने पर हमें मेल के द्वारा संपर्क करें- [email protected] आप हमें इस फॉर्म से भी संपर्क कर सकते हैं, 2 घंटे में रिप्लाई दिया जायेगा |
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