जानिये इन 6 शूरवीरों जो आज के वक़्त में दिखा रहे हैं भाजपा मोदी को आईना

#1. कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार का नाम उस समय सुर्खियों में छाया था जब जेएनयू के कुछ छात्रों पर देशद्रोह का आरोप लगा था जिनमे से मुख्य कन्हैया कुमार थे जो बाद में निर्दोष साबित हुए | कुछ मीडिया संस्थानों और केंद्र सरकार के कारण जेएनयू का नाम देशद्रोह के आरोप में उछाला गया था जो वाकई शर्म की बात है |

कन्हैया कुमार बिहार से है और जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज के लिए पीएचडी कर रहे है | कन्हैया ने राजनीति का पहला बिगुल तब बजाया था जब वो ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के सदस्य बने और जिसके लिए उन्होंने एआईएसए, एबीवीपी, एसएफआई और एनएसयूआई के सदस्यों को हराया |

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#2. हार्दिक पटेल

हार्दिक पटेल, पाटीदार आन्दोलन का सबसे बड़ा चेहरा जिसने गुजरात में मोदी-अमित शाह की जड़े हिला कर रख दी | मात्र 22 वर्ष के हार्दिक पटेल इस वक़्त भाजपा का सबसे बड़ा सर दर्द है क्योंकि उन्होंने आरक्षण जैसे मुद्दे को पूरे देश में फैला दिया |

‘हू टुक माइ जॉब: भारतीय आरक्षण प्रणाली को क्यों बदलने की जरुरत है’ नाम की एक पुस्तक जल्द ही रिलीज़ होने वाली है जिसमे हार्दिक पटेल ने बेरोज़गारी जैसी समस्या को उठाया है |

पटेल ने अपने एक बयान में कहा था, कि  “किताब के कुछ अंश के मुताबिक जनसंख्या के अनुसार सभी को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। देश में कृषि अपनी बुरी अवस्था में है, रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं, अच्छी नौकरी के लिए अच्छी शिक्षा जरूरी है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को खत्म किया जाए लेकिन मेरे विचार से मेधावी छात्रों के इस मौकों को दूसरे के लिए नहीं छीनना चाहिए।”

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#3. डॉ आनंद राय

डॉ आनंद राय वो नाम है जिन्होंने व्यापम घोटाले का काला चिट्ठा सबके सामने खोल कर रख दिया था और तब से उन्होंने कई सनसनीखेज घोटले उजागर किये | हाल ही में उन्होंने दिल्ली के AIIMS में MBBS के लिए हुए एंट्रेंस एग्जाम का पर्चा लीक होने की खबर अपने ट्विटर अकाउंट से दी |

उन्होंने कथित तौर पर लीक हुए पेपर के कई स्क्रीनशॉट्स भी अपने ट्विटर अकाउंट से पोस्ट किए हैं। एक विडियो जारी कर डॉ. राय ने मांग की है कि 28 मई को हुई इस परीक्षा के पेपर लीक होने की सीबीआई कराई जाए।

उनके इस दावे के बाद AIIMS प्रबंधन भी हरकत में आया है और जांच कराने की बात कही गई है। बिहार में जिस हॉस्पिटल ने अपने कर्मचारियों की विर्जिंनिटी जैसे जानकारी मांगी उसका भी मुद्दा डॉ आनंद राय ने उठाया था |

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#4. जिग्नेश मेवानी

नरेन्द्र मोदी के गढ़ गुजरात में हार्दिक पटेल के बाद दूसरा नाम आता है जिग्नेश मेवानी का जो हाल ही में दलितों का मसीहा बन कर उभरे है | मामला- दलित परिवार की पिटाई- के बाद जिग्नेश मेवानी जो की एक पत्रकार रह चुके है दलित आन्दोलन का प्रमुख चेहरा बने |

ऊना में दलितों पर हुए अत्याचार के बाद जिगनेश ने ही दलित लोगों को समाज की गंदगी उठाने से मना किया था। इसमें तय हुआ था कि दलित समुदाय के लोग ना तो मैला उठाएंगे और ना ही मरे हुए पशुओं को लेकर जाएंगे |

इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रेजुएशन कर चुके जिग्नेश कहते है ‘200 प्रतिशत मैं राजनीति में आऊंगा। लेकिन मैं आम आदमी पार्टी से इसलिए जुड़ा हूं ताकि दलित समुदाय के लिए जो मैं करना चाहता हूं वह सब कर सकूं।’ गुजरात में जिग्नेश आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता की भूमिका भी निभाते है |

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#5. शेहला रशिद शोरा

शेहला रशिद का नाम भी देशद्रोह के आरोप से जूझ रहे जेएनयू से ही निकला है | राजनीती में आने से पहले शेहला रशीद कश्मीर में इंटरनेट की आजादी से लेकर महिलाओं पर एसिड अटैक जैसे मुद्दों को उठाया करती थी |

जेएनयू में आने के बाद AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) ज्वाइन कर ली और कई मूवमेंट्स में पार्टिसिपेट किया | कन्हैया कुमार का मुद्दा सामने आने के बाद शेहला की माँ ने चिंता ज़ाहिर की और पॉलिटिक्स छोड़ने को कहा मगर शेहला ने उन्हें बताया की उन्हें बहुत सारे लोगो का समर्थन प्राप्त है |

शेहला ने बताया, “मैं पुराने श्रीनगर के हब्बा कदल मोहल्ले से ताल्लुक रखती हूं। यहां महिलाओं की आजादी सीमित है।”

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#6. रविश कुमार

NDTV के पत्रकार रविश कुमार भी इसी फेहरिस्त में शामिल है जो कदम कदम पर केंद्र के गलत फैसलों और उनसे पड रहे समाज पे असर को उजागर करता रहता है | बाकी पत्रकारों की तरह टीवी में ज्यादा शोर नही मचाते मगर उनकी बात बड़े बड़े आला नेताओ तक पहुच ही जाती है | ये विडियो आपको बतायेगा रविश कुमार के बारे में कुछ और अनकही बाते!

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