भाजपा संघ की उड़ी धज्जियां, ‘वन्दे मातरम’ पर सुप्रीम कोर्ट का आ गया सबसे बड़ा फैसला - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

भाजपा संघ की उड़ी धज्जियां, ‘वन्दे मातरम’ पर सुप्रीम कोर्ट का आ गया सबसे बड़ा फैसला

सदियों पहले जब हम धर्म के आधार पर नहीं बटे हुए थे, तब तक हिन्दू होना किसी के लिए देश भक्ति का प्रतीक और देश विश्वास का कारण नहीं बल्कि सिन्धु नदी के इस पार रहने वाले लोगों के लिए एक भौगोलिक सम्बोधन था.

क्योंकि फ़ारसी लोग ‘स’ को ठीक से नही बोल पाते थे इसलिए उनके लिए सिन्धु शब्द हिन्दू हो गया.

देश में फ़र्ज़ी देशभक्त दिखा रहे हैं गुंडागर्दी

उस वक्त लोगों के लिए हिन्दू या हिन्दुत्व बिल्कुल एक अनजान शब्द था, लेकिन अगर अब हाले स्तिथि पर नज़र डाले तो अब पूरे देश में फ़र्ज़ी देशभक्तों की मानो बाड़ सी आ गई है.

परिणामस्वरूप देश भर में मुसलमानों को अपनी देश भक्ति साबित करने के लिये कुछ देश के ठेकेदार बने बैठे लोग उन्हें मजबूर कर रहे है.

वन्देमातरम बोलकर मुसलमानों को देना पड़ रहा हैं अपने देशप्रेम का सबूत

पिछले कुछ सालों से “वन्देमातरम” गाने को लेकर देश में भूचाल सा आया हुआ है और जिसके लिए देश के मासूम मुसलमानों को ज़बरदस्ती ये गाना गाने के लिये जगह-जगह मजबूर किया जा रहा है.

इसके लिए कई लोगों के साथ हिंसा के मामले भी सामने आए हैं.

ऐसे में अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस संबन्ध में सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही अहम फ़ैसला सुनाते हुए देश के फ़र्जी भक्तों को तमाचा जड़ दिया है.

वन्देमातरम को लेकर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने..?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक बैच ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए साफ़ कर दिया है कि ‘वंदेमातरम’ गाना अनिवार्य नहीं है.

सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले से अब नहीं गाना पड़ेगा मुसलमानों को ‘वन्देमातरम’.

जी हाँ बैंच ने ये फैसला एक याचिका की सुनवाई के दौरान उसे ख़ारिज करते हुए सुनाया.

इस दौरान सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि,

“संविधान के अनुच्छेद 51A में सिर्फ़ राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज को बढ़ावा देने की बात कही गयी है. जबकि ‘वंदेमातरम’ का इसमें कोई ज़िक्र नहीं है.”

आखिर क्या है अनुच्छेद 51A..?

दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 51A में सभी भारतीय वासियों के कर्तव्यों का विस्तार में उल्लेख किया गया है.

ये कर्तव्य हर एक भारतीय को निभाने पड़ते है.

लेकिन अब सुप्रीमकोर्ट ने इस बात पर मोहर लगा दी हैं कि वंदेमातरम को उन कर्तव्यों की सूची में नहीं रखा गया है.

काफ़ी समय से चल रहे इस बवाल में वंदेमातरम के नाम पर कुछ कट्टरपंथी देश के लोगों के बीच ये माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो वंदेमातरम नहीं गायेगा वो देशभक्त नहीं है जबकि संविधान में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है.

भारत हमेशा से रहा है एक धर्मनिरपेक्ष देश

जैसा सब जानते हैं कि भारत हमेशा से ही एक धर्मनिरपेक्ष देश रहा है लेकिन इस बात में भी कोई दौराय नहीं हैं कि भाजपा सरकार को ये बात शुरुआत से ही मंज़ूर नहीं रही है.

क्यूंकि बाबरी विध्वंस के रूप में BJP सरकार की नींव ही साम्प्रदायिक तनाव पर राखी गयी थी.

इसलिए भी हमेशा से ही भाजपा खुद को देशभक्त बताते हुए दूसरों को देशभक्त होने के लाइसेंस बटने का काम कर रही है.

सुप्रीमकोर्ट ने मारा बीजेपी को तमाचा

ऐसे में अब सुप्रीमकोर्ट ने बीजेपी को उसकी औकात दिखाते हुए ये साफ़ कर दिया हैं कि भारत का हर नागरिक वंदेमातरम कहने या न कहने के लिए आज़ाद है और भारत का हर नागरिक देशभक्त है.

BJP सरकार या भाजपा सरकार से जुड़े दल और असामाजिक तत्व कोई नही होते किसी को देशभक्ति का सर्टिफिकेट देने वाले.

निष्कर्ष

वाकई सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला उन तमाम असामाजिक तत्वों और धर्म और देशभक्ति के नाम पर लड़वाने वालों के मुंह पर एक ज़ोरदार थप्पड़ है. इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ़ कर दिया हैं कि वन्देमातरम गाने का दबाव कोई भी भारतीय नागरिक किसी दुसरे भारतीय नागरिक पर नहीं डाल सकता. ऐसे करना कानून की नज़र में भी जुर्म है.

story source: https://openkhabar.com/suoreemcourt-ne-bjp-or-rss-ko-toka/

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