भाजपा सरकार में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वाजपायी समेत नेताओ को छोड़ना पद सकता है सरकारी घर, जाने कारण ?

भारत देश में कई राजनेता जैसे मुख्यमंत्री, विधायक व मंत्रियों के अलावा राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को जो सुविधाएं दी जाती है वो आम आदमी को उनकी जिंदगी में मिलना बेहद मुश्किल होती है। विधानसभा व लोकसभा संसद के अनुसार सरकारी जनप्रतिनिधियों को उनके कार्यकाल के दौरान कई सुविधाएं दी जाती है।

चुनाव जीतने के बाद इन्हें सरकारी आवास, टेलीफोन सुविधा, गाडी, सुरक्षा व निजी सहायक सहित कई तरह की तमाम सुविधाएं दी जाती है। लेकिन इन सुविधाओं को उनके पद से हटने के बाद भी जारी रहने दी जाती है। इन सरकारी सुविधाओं से किसी भी राजनेताओं का मोहभंग ही नहीं होता है। कोई भी इसे छोड़ने को राजी नहीं होता है।

कई पूर्व विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों सहित कई पूर्व राजनेताओं को इन सरकारी आवासों व सुख-सुविधाओं से इतना लगाव हो जाता है कि ये इसे छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं रहते है।

लेकिन अब माना जा रहा है कि सभी पूर्व सरकारी राजनेताओं से सरकारी पद से हटने के बाद व सत्ता से बेदखल होने के बाद इन सुविधाओं को छीना जा सकता है। इससे देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों व राष्ट्रपति व मुख्यमंत्रियों की मुश्किले बढ़ सकती है।

दरअसल इन दिग्गजों को अब अपने सरकारी आवास को खाली करना पड़ सकता है। ये दिग्गज पहले महत्वपूर्व पदों पर कार्यरत थे लेकिन अब ये उस पद से निवृत हो गए तो इन्हें इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए।


ये सुझाव  देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रहमण्‍यम ने सुप्रीम कोर्ट को दिया है। दरअसल पिछले साल 23 अगस्त को एनजीओ लोक प्रहरी ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि सरकारी पदों से हटने के बाद भी सरकारी बंगले सहित इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इस पर कोर्ट ने गोपाल सुब्रमण्यम को इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।

पू्र्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने देश के पूर्व राष्ट्रपति व पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के बाद उनके सरकारी निवास को खाली करवाने का सुझाव सुप्रीम कोर्ट को दिया है। उन्होंने कहा है कि पद से हटने के बाद भी ये नेता अपने सरकारी आवास में ही रहते है जो कि खुले रूप से कानून का उल्लंघन है।

अगर इन सुझावों को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया तो अटल बिहारी बाजपेयी, मनमोहन सिंह व कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना निवास खाली करना पड़ सकता है। अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ लोक प्रहरी की याचिका पर यूपी के 6 पूर्व सीएम से सरकारी बंगले खाली करवाए थे।

लायम सिंह यादव, मायावती, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, रामनरेश यादव और एन डी तिवारी से भी उनका सरकारी आवास खाली करवाने का निर्देश कोर्ट ने दिया था।

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