आजाद भारत में दुसरी बार रात के 1 बजे खुला सुप्रीम कोर्ट, कारण जान आप रह जाएंगें हैरान

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जैसा सभी जानते हैं कि कर्नाटक के चुनाव नतीजों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है.

जिसके बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और बीजेपी दोनों ने अपने-अपने स्तर पर सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के सामने पेश किया था.

कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा किया था पेश

बता दें कि इस चुनाव में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिली थीं.

जिसके तुरंत बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान करके सरकार बनाने का दावा पेश किया.

कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 112 है और जेडीएस-कांग्रेस के पास कुल 115 विधायक हैं.

लेकिन जैसा शुरुआत से ही कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई के बीजेपी कनेक्शन को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी.

राज्यपाल ने भाजपा नेता येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए चुना

उसे सच करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल ने भाजपा नेता येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए बुलाया जिसमें उन्होंने 15 दिनों के अंदर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने को कहा है.

कर्नाटक की राजनीति में आए इस मोड़ के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और देर रात को ही रजिस्ट्रार को तत्काल सुनवाई के लिए अपनी अर्जी दी.

शीर्ष न्यायालय ने भी अपना काम करते हुए कांग्रेस और जेडीएस की इस तत्कालीन याचिका पर कनार्टक सरकार व येदियुरप्पा को नोटिस जारी करते हुए इस पर जवाब मांगा है.

कांग्रेस की अर्जी पर आधी रात को लगी सुप्रीम कोर्ट 

 

गौरतलब हैं कि मुंबई बम धमाके के आरोपी याकूब के मामले में आधी रात सुप्रीम कोर्ट खुलने के बाद यह दूसरा मौका था जब सुप्रीमकोर्ट में एक बार फिर देर रात हाई प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला.

बता दें कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा बीजेपी के येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा.

सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर उनकी याचिका स्वीकार कर ली और रात के 1:45 मिनट पर तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की.

कोर्ट ने कांग्रेस को दिया विश्वास मत साबित करने के लिए 15 दिनों का वक्त

इस ख़ास बेंच में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस सीकरी और जस्टिस बोबडे शामिल थे.

मामले में केंद्र सरकार की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, बीजेपी की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पक्ष रखने पेश हुए.

कोर्ट ने गवर्नर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि शपथ ग्रहण पर रोक नहीं लगाई जा सकती है,

हालांकि, कोर्ट ने इस बात को माना है कि विश्वास मत साबित करने के लिए दिए गए 15 दिन के समय पर सुनवाई हो सकती है.

निष्कर्ष

वाकई ये देखना अब बेहद दिलचस्प होगा कि 15 दिन के अंदर क्या कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन अपना बहुमत साबित करने में कामियाब हो सकेगी या फिर बीजेपी समय का फ़ायदा उठाते हुए नेताओं को तोड़ने में कामियाब होगी.


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