अभी अभी- 2 बड़े सिकंदर अब लड़ेंगे 2019 लोकसभा चुनाव

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दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उपाध्यक्ष शेहला राशिद केंद्र में सत्ता जमाये बैठी मोदी सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुमलों का विरोध हर कार्यक्रम में नज़र आते हैं।

वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना में ये दोनों छात्रनेता कोई कमी नहीं छोड़ते। साल 2016 में देशद्रोह के आरोपों में घिरे कन्हैया कुमार और शेहला राशिद अब सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

बीजेपी और पीएम मोदी की नीतियों पर खड़े कर चुके हैं सवाल

खबर सामने आई है की साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो दोनों युवा नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वह 2019 का आम चुनाव लड़ सकते हैं। यह दोनों छात्र नेता सोशल मीडिया साइट पर काफी सक्रिय रहते हैं और बीजेपी सरकार के द्वारा लिए गए किसी भी फैसले पर अपनी प्रतिक्रियाएं लोगों के सामने रखते हैं।

सोशल मीडिया साइट्स पर इनकी लोकप्रियता

जहां सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर कन्हैया कुमार डेढ़ लाख से ज्यादा यूज़र द्वारा फॉलो किए जाते हैं वहीं शेहला राशिद की लोकप्रियता भी कुछ कम नहीं है,  शेहला राशिद के ट्विटर पर तीन लाख से ज्यादा फॉलोवर है। हाल ही में पत्रकारों से बातचीत में कन्हैया ने बताया कि वे सोशल और राजनीतिक संगठनों का विशाल सामूहिक मोर्चा बनाने की कोशिश में जुटे हैं। ये मोर्चा उदार, प्रगतिवादी सोच के लोगों को आगे लाकर 2019 में भाजपा का मुकाबला करेगा।

यहाँ से लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव

इस कड़ी में कन्हैया और शेहला दोनों ही पिछले साल हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की जीत का उदाहरण देते हैं। सूत्रों की माने तो श्रीनगर की रहने वाली है ना पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ सकती है हाल ही में एक बयान देते हुए कहा था कि अगर सभी चीजें सामान्य रहती हैं और ऐसे में इस तरह की परिस्थिति बनती है कि मैं कहीं से चुनाव लड़ सकती हूं तो मैं जरूर लड़ूंगी। शेहला ने अभी किसी दल में रूचि नहीं दिखाई है।

लोकसभा चुनाव के लिए ये हैं इन दोनों छात्र नेताओं की रणनीति

कन्हैया का कहना है कि अगर बिहार में राष्ट्रीय जनता दल कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन होता है और वह मुझे अपना उम्मीदवार चुनते हैं तो मैं उनका उम्मीदवार बन सकता हूं।

क्योंकि मैं संघटित राजनीति में यकीन रखता हूं मैं किसी भी तरह के करिश्मे में विश्वास नहीं रखता। माना जा रहा है कि अगर कन्हैया लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो वह बिहार कि किसी सीट से चुनावी दंगल में उतरेंगे। अगर ऐसा होता है कि यह दोनों नेता लोकसभा चुनाव लड़े तो यह सीधे BJP को जमीनी स्तर पर चुनौती चुनौती देना समझा जाएगा।


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