पलट गया कर्नाटक में मामला, कांग्रेस की बनेगी सरकार

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बीते दिनों से पल-पल कर्नाटक की सियासी तस्वीर में बदलाव देखने को मिल रहा है.

जब एक तरफ राज्यपाल का साथ पाकर बीजेपी के बीएस यदुरप्पा ने सुबह नौ बजे बेंगलुरू स्थित राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे

तो उसी वक्त कांग्रेस और जेडीएस के विधायक इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताते हुए विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे नज़र आए.

कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने के चक्कर में बीजेपी 2 विधायक खो बैठी

बीजेपी के सामने किसी भी तरह अपना बहुमत जुटाने की चुनौती है तो वहीं कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के लिए अपने विधायकों को रोकने की बड़ी चुनौती है.

इस बीच खबर है कि कांग्रेस के चार विधायक पार्टी की बैठकों में नहीं शामिल हो रहे हैं. जिसमें से दो विधायकों के भारतीय जनता पार्टीके साथ जाने की भी खबर है.

100 करोड़ में बीजेपी खरीद रही हैं विधयाकों को

सूत्रों की माने तो बीजेपी ने विधायकों को 100 करोड़ का ऑफर देकर उन्हें खरीदने का प्रयास किया.

ऐसी बीच जब बीजेपी कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने में हर संभव कोशिश कर रही थी तो उसी समय का फ़ायदा उठाते हुए कांग्रेस ने एक बड़ी रणनीति चलते हुए बीजेपी की मुश्किलें फिर बढ़ा दी.

कांग्रेस ने पलटी बाजी

जी हाँ जहाँ बीजेपी कांग्रेस के चार विधायकों के गायब होने की ख़ुशी मना रही थी वहीं कांग्रेस बाजी पलटती दिखी.

दरअसल, कांग्रेस ने समय का फ़ायदा उठाते हुए कल तक बीजेपी के साथ दिख रहे दो निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में ले लिया है.

टूट रही हैं बीजेपी की उम्मीद

यही दोनों निर्दलीय विधायक एच नागेश और केपीजेपी के विधायक आर शंकर आज कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में भी नजर आए.

हावेरी जिले के रानी बेननू विधानसभा सीट से विधायक आर शंकर ने पहले बीजेपी का समर्थन करते हुए येदुरप्पा को समर्थन देने का ऐलान किया था.

लेकिन कांग्रेस के विधयाकों को तोड़ने में व्यस्त बीजेपी निर्दलीय विधायकों की चिंता करना ही भूल गई जिसका फ़ायदा ठीक समय पर कांग्रेस ले गई.

कर्नाटक की हालेस्तिथि पर एक नज़र

गौरतलब हैं कि कर्नाटक में 222 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिसमें से बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 (78+37=115) सीटें मिली थीं.

केपीजेपी, बीएसपी ने निर्दलीय पर एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी.

ऐसे में सरकार बनाने के लिए सूबे में 112 सीटों की जरूरत है.

जिससे देखते हुए नतीजो के तुरंत बाद कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन का ऐलान किया और राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा किया.

हालांकि राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के आधार पर बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया.

जिसके बाद कांग्रेस पुरे मामले के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंची.

निष्कर्ष

गौरतलब हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने देर रात सुनवाई करते हुए राज्यपाल के फैसले पर तो रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए साफ़ तौर पर कहा. जिसके बाद गुरूवार को येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. ऐसे में अब उन्हें अगले 15 दिनों के भीतर बहुमत सिद्ध करना है. जिसके बाद बड़ा सवाल है कि निर्दलीय विधायकों के कांग्रेस के साथ जाने पर अब ये देखना दिलचस्प होगा कि यदुरप्पा कैसे अपना बहुमत साबित कर पायेंगे.


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