भाजपा के लिए पैदा हो गयी ये नई बड़ी मुसीबत, भाजपा आ गयी गहरी उलझन में

उत्तरप्रदेश एक ऐसी जगह है जहाँ से केंद्र की राजनीती तय होती है और यहाँ की राजनीती समझना टेडी खीर की मानिंद है ! यहाँ की जनता किसे समर्थन देती है और किसे अपना मत ये आखिर तक लोगों के लिए महज एक पहेली ही बनी रहती है !

यूपी में होगा उपचुनाव…?

चूँकि मायावती ने तो राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे ही दिया और अभी यूपी में उनकी पार्टी बसपा और सूबे की बड़ी पार्टी सपा ले एमएलसी ने इस्तीफ़ा दिया है तो उनकी ये सीटें खाली हुई हिं जिनपर उप चुनाव के लिए गुरुवार को चुनाव आयोग ने नोटिस दिया हुआ है !

भाजपा की बढ़ गयी मुसीबत…?

चूँकि भाजपा का प्रदेश में शासन के मामले में हाल खस्ता ही रहा है और केंद्र का नेतृत्व भी ढीला ही रहा है ! अभी हाल ही में यूपी में इतने बच्चे सरकार की लापरवाही से मारे गये ! ऐसे में भाजपा के सामने इन सीटों पर दावेदार कौन बनाया जाये ये तय करना मुस्किल हो रहा क्योकि अभी भाजपा के अनुकूल माहौल नहीं है !

सूबे की चार सीटों के लिए 29 अगस्त को अधिसूचना जारी की जाएगी। मतदान 15 सितंबर को होगा।

इसलिए भी है मुसीबत ज्यादा..?

अभी इन खाली हुई सीटों पर सपा के बुक्कल नवाब, यशवंत, अशोक वाजपेयी, सरोजनी अग्रवाल और यशवंत सिंह ने इस्तीफ़ा दिया है। यह सभी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अब सबसे बड़ी उलझन भाजपा के सामने है।

4 सीटें हैं और दावेदार 5 हैं। मुख्यमंत्री योगी  आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा, मंत्री मोहसिन रजा और स्वतंत्रदेव सिंह किसी भी सदन के सदस्य नहीं है।इन चार सीटों पर केवल चार लोग ही एमएलसी बन सकते हैं। अब देखना होगा कि भाजपा मुख्यमंत्री को एमएलसी बनाती है या मंत्रियों को

वहीँ इन चारों सीटों पर निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा के पास ही विधायकों की संख्या है। ऐसे में कोई दल शायद ही उमीदवार खड़ा करे। चुनाव आयोग ने 15 सितंबर को होगी वोटिंग और गिनती तारीख तय की है।

उपचुनाव के लिए 29 अगस्त को अधिसूचना जारी की जाएगी। पांच सितम्बर तक उम्मीदवार अपना नामांकन कर सकेंगे और छः सितम्बर को उम्मीदवारों के आवेदन की स्क्रूटनी होगी। यदि कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहता है तो आठ सितम्बर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।

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