शेयर करें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण के मामले में पर्यावरणविद् एडवोकेट महेश चंद्र मेहता द्वारा 1985 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की है। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोलियम मंत्रालय को लताड़ लगाई है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की दो सदस्यीय पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि क्या मंत्रालय खुद को भगवान समझता है या खुद को भारत सरकार से भी ऊपर मानता है। क्या उन्हें लगता है ‘खाली’ बैठे जज उनकी दया पर हैं।

1. सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोलियम मंत्रालय को लगाई लताड़

सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक इकाइयों में पेटकोक के इस्तेमाल से संबंधित मामले में नाराजगी जाहिर की है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि इस मंत्रालय ने रविवार को ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पेट कोक के आयात पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे से अवगत कराया है।

2. लगाया 25 हजार रुपए जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रूख अपनाते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पर इस लापरवाही के लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर भी एक लाख रूपए का जुर्माना लगाया है। क्योंकि दिल्ली सरकार में राजधानी में अनेक रास्‍तों पर यातायात अवरूद्ध होने की समस्या को दूर करने के लिए कोई समयबद्ध स्थिति रिपोर्ट पेश नहीं की। कोर्ट का कहना है कि दिल्ली सरकार आदेशों के प्रति गंभीर नहीं है। इस मामले में अब कोर्ट 16 जुलाई को सुनवाई करेगा।

निष्कर्ष: मोदी सरकार के राज में हर मंत्रालय अपनी मन मर्जी से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करना मोदी सरकार की तानाशाही का एक बहुत बड़ा उदारहण है।

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

शेयर करें