अभी अभी- सुप्रीम कोर्ट का फूटा गुस्सा, कांवड़ियों को लेकर बड़ा फैसला

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देश में धर्म के नाम पर पाखंड और गुंडागर्दी फैलाने वाले पिछले पांच सालों से पूरे जोर शोर से काम कर रहे हैं। इन लोगों ने विभिन्न संगठनों ने नाम की आड़ में कुकृत्यों को अंजाम देते आये हैं।

अजब बात ये है कि केंद्र में सत्तासीन बीजेपी सरकार के कुछ मंत्री भी इन हुड़दंगियों का समर्थन करते आये हैं। देश की कानून व्यवस्था को खराब करने वाले इन गुंडों को जब राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो तो पुलिस भी खुद को लाचार पाती है। ऐसे में कानून की दखलअंदाजी जरूरी हो जाती है।

1. गुंडागर्दी फैलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला

देश में गुंडागर्दी फैलाने का एजेंडा लिए सरकार चलाने वाले जब हुंड़दंगियों का समर्थन करने लगे तो कोर्ट ऐसी सरकारों से सख्ती से पेश आता है।

कोर्ट का काम कानून व्यवस्था को बनाये रखने का आदेश देना है और सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि वो इन आदेशों को हर हाल में लागू करे।

2. हिंसा फैलाने का काम करती हैं कुछ राजनीतिक पार्टियां

देश में खूनखराबे और तनाव का माहौल बना रहे, इस मंतव्य को लेकर कुछ राजनीतिक दल भीड़ द्वारा की गई हिंसा की घटनाओं पर कार्यवाई नहीं करते हैं।

गुजरात और मुजफ्फरनगर में दंगों और हिंसा की घटनाएं ऐसी सरकारों राजनितिक दलों का उदारहण हैं। कुछ नेता इन घटनाओं को लोगों की भावनाओं को और भड़काने और अपने वोटबैंक को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

3. कांवड़ियों के उत्पात पर कोर्ट ने कहा- हम करेंगे कार्यवाई

पिछले दिनों कांवड़ यात्रा के नाम पर दंगे भड़काने और हिंसा फैलाने निकले भगवा गुंडों ने सार्वजानिक सम्पति और लोगों की निजी सम्पति को नुक्सान पहुँचाया है।

घटना को लेकर सरकार ने अपने होंठ सिल लिए हैं। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त गुंडों पर पुलिस भी पूरी तरह से कार्यवाई नहीं कर पा रही।

ऐसे में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने पर कोर्ट ने साफ़ तौर पर कह दिया है कि वो गुंडई कांवड़ियों पर कार्यवाई करेगी। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि गुंडई कांवड़िये हीरो बनना चाहते हैं तो अपने घर को आग लगाएं लोगों की संपत्ति को नहीं।

4. बीजेपी सरकार को अन्य घटनाओं पर भी लगाई फटकार

कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई है।

कोर्ट ने साफ़ तौर कहा है कि वो भीड़तंत्र को काबू करने के लिए बनाये जाने वाले किसी नए कानून का इन्तजार नहीं करेगी और हुड़दंगियों पर तुरंत कार्यवाई करेगी। पद्मावत, मराठा आरक्षण जैसी हिंसाओं का भी कोर्ट द्वारा जवाब माँगा गया।

निष्कर्ष:

कोर्ट द्वारा बीजेपी का बढ़ते अपराध को लेकर घटिया रवैया देखकर सख्त होना जायज है। अपराध देख आँखें मूंदने वाली इस पार्टी को बैन कर देना चाहिए।


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