अमृतसर रेल हादसे में कोर्ट ने सुनाया फैसला

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अमृतसर रेल हादसे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल की साजिशों को कोर्ट ने नाकाम कर दिया है. कई दिनों से दोनों दल ये कोशिश कर रहे थें कि किसी तरह से पंजाब कांग्रेस के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धु को बदनाम किया जाए या फर्जी मुकदमें में फंसा दिया जाए, लेकिन एक बार फिर से सिद्धु की जीत मिली है.

1. अमृतसर हादसे में फंसाने की हुई थी कोशिश

पंजाब के अमृतसर में दशहरे के दिन रावण हादसे के दौरान हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे के दौरान नवजोत सिंह सिद्धु की पत्नी और पूर्व विधायक नवजोत कौर मंच पर मौजूद थीं. बस इसी बात को आधार बनाकर उन्हें मामले का आरोपी बनाने की कोशिशें की जा रही थी.

2. मजिस्ट्रेट ने कहा आरोप बेबुनियाद

मामले की जांच कर रहे जालंधर के डिविजनल कमिश्नर सह मजिस्ट्रेट बी पुरुषार्थ ने कहा कि हमनें मामले की हर तरह से जांच कर ली है. 3000 पन्नों की रिपोर्ट जारी की गई है.

इसमें अमृतसर प्रशासन और अमृतसर नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है. किसी भी तरह के हादसे के लिए वहां मौजूद गणमान्य अतिथियों के कैसे दोषी ठहराया जा सकता है !

3. प्रबंधन की लापरवाही से हादसा

रिपोर्ट में कहा गया है कि रावण दहन कार्यक्रम के आयोजक पार्षद विजय मदान के बेटे सौरभ मदान की भी लापरवाही भी सामने आई है. आयोजकों ने कायदे से उचित अनुमति नहीं ली थी. भीड़ के प्रबंधन की परवाह नहीं की गई थी. हादसे को लेकर आयोजक अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं सकते.

4. सिद्धु का बयान

क्लीन चिट मिलने के बाद कांग्रेस नेता सिद्धु और उनकी पत्नी नवजोत कौर ने कहा कि जिसके सिर उपर तू स्वामी, सो दुख कैसा पावे. मेरे उपर गुरु नानक का हाथ है. नरेंद्र मोदी और बादल जैसे लोगों की उनके सामने कोई औकात नहीं, वो मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते.

निष्कर्ष :

सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. सिद्धु सदैव सत्य के मार्ग पर अटल रहते हैं. उन्हें इंसाफ मिलना लाजिमी था.


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