आओ सुनाऊं सतना स्मार्ट सिटी की कहानी, पहली बारिश में हो गया पानी पानी, देखें

पिछले साल के इसी महीने में जब मध्य प्रदेश के सतना शहर को स्मार्ट सिटी की सूचि में शामिल किया गया था तो शहर भर में खूब ढोल नगाड़े बजाए गए थें. मेयर साहिबा में निगम कार्यालय में नोट उड़ा उड़ा कर ठुमके लगाए थें.

लोगों के अंदर उम्मीद जगी थी कि अब हमारा सतना स्मार्ट हो जाएगा, लेकिन इस ढोल की पोल पहली बारिश में हीं खुल गई. पूरा शहर जलमग्न हो गया है. लोगों में त्राहिमाम है. भय है कि कहीं महामारी न फेल जाए.

1. नौका विहार के लिए अच्छा है !

बर्बादी को विकास का नाम देने वाली भाजपा अगर पानी में डूबे शहर को नौका विहार पर्यटन के लिए उपयुक्त बता दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. सतना शहर की इस दुदर्शा से स्थानीय लोग बुरी तरह आक्रोशित हैं.

पिछले 15 सालों से मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है. जहां यह प्रदेश हर मोर्चे पर लगातार पिछड़ता जा रहा है तो वहीं यहां की सरकार दिन भर अपना अलग हीं नगाड़ा बजाती रहती है. अखबारों के विज्ञापनों से जबर्दस्ती का विकास दिखाया जाता है.

2. शहर नहीं है भैंसों का तबेला लगता है

स्मार्ट सिटी घोषित कर सतना के लोगों को सिर्फ हवाई सपने दिखाए जा रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि इतने दिनों बाद भी पूरा शहर गंदगी के ढेर पर खड़ा है. जिधर देखिए उधर कूड़े कर्कट का अंबार लगा हुआ है. नालियों से बहता पानी, कीचड़ से पटी सड़कें मोदी सरकार के स्मार्ट सिटी की पहचान है.

निष्कर्ष : मोदी सरकार की अधिकांश योजनाएं जमीन पर पूरी तरह फेल है. केंद्र की मोदी सरकार या राज्य की शिवराज सरकार, दोनों के पास विकास का कोई रोडमैप नहीं है.

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

Close