नहीं होता ये सिक्ख युवक तो उत्पाती कांवड़िए ले लेते महिला की जान, देखें मंजर

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दो दिनों से काफी चर्चा में रही थी राजधानी दिल्ली के मोती नगर की वो घटना जिसमें शिवभक्त कांवड़ियों ने जिस तरह से उत्पात मचाते हुए कार में तोड़फोड़ की और उसे पलट दिया. कार एक महिला चला रही थी. उनका कसूर सिर्फ इतना हीं था कि भारी ट्रैफिक वाले इस इलाके से कांवड़ियों का झुंड जा रहा था और उनकी कार एक कांवड़िए में हल्की सी सट गई थी.

 

1. महिला ने सुनाई आपबीती

जो महिला कार चला रही थी, उसने अपने आपबीती बताते हुए कहा कि अगर वहां एक सरदार जी नहीं होते तो अनर्थ हो जाता. महिला ने बताया कि कार से टच होते हीं कांवड़िए इस कदर बौखला गए तो गाड़ी पर हमला शुरु हो गया.

पास में एक हीं सरदार जी गुजर रहे थें. उन्होंने कांवड़ियों की परवाह किए बगैर हमारी गाड़ी का दरवाजा खोला और मुझे और मेरे पति को कवर करते हुए बाहर निकाल लिया. इस दौरान थोड़ी चोट उन्हें भी आई लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की.

महिला ने कहा कि सरदार जी मेरे लिए किसी देवदूत से कम नहीं थें क्योंकि वहां पुलिस भी मौजूद थी तो और भीड़ का उत्पात देखकर मूकदर्शक बनीं रही.

2. कांवड़ियों ने कहा पकड़ो उस सरदार को

महिला ने कहा कि जैसे हीं सरदार जी ने हमें किनारे किया तो कांवड़िए शोर मचाने लगे कि पकड़ो उस सरदार को, उसी ने औरत को भगा दिया लेकिन सरदार जी वहां से भागे नही तो और भीड़ से कहा कि औरत को क्यों मारना चाहते हैं. मार दिजिए मुझे. इतने में पुलिस के जवानों ने उन्हें घेर लिया अन्यथा उनके साथ कुछ भी हो सकता था.

महिला ने कहा कि कार को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद सरदार जी ने एक बार फिर बहादुरी दिखाई और पलटे हुए कार से पर्स लाकर दिया.

3. कहां से आया बेस बैट


महिला ने कहा कि उत्पाती कांवड़ियों के हाथ में बेस बैट था जिससे वो लगातार कार पर हमला कर रहे थें. ये समझ से परे हैं कि जो लोग भगवान को जल चढ़ाने जा रहे थें, उनके पास तो एक झोला और कंधे पर कांवर होता है, उनके पास इतनी हथियार कहां से आ गया.

महिला ने उस सिक्ख युवक के बारे में कहा कि वो इंसान मदद करके कहां चला गया, पता भी नहीं चला. मैं उसे अपने लिए देवदूत न कहूं तो और क्या कहूं.

निष्कर्ष :

भगवान के भक्तों की इस हरकत पर क्या कहा जाए, बिल्कुल निःशब्द और स्तब्ध करने वाली घटना है.


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