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देश में सत्ता में आने से पहले बीजेपी सरकार जिन मुद्दों पर कांग्रेस की आलोचना करती आई थी। आज उन्हीं मुद्दों को अपनी कामयाबियों के रूप में गिनाने लगी है। कभी पेट्रोल की कीमतों में मामूली सी बढ़ौतरी पर हो हल्ला करने वाले भाजपाई आज कीमतों को जायज ठहराने के बहाने ढूंढ रहे हैं। ऐसे ही मुद्दों की लिस्ट में एक नाम राफेल लड़ाकू विमान का भी है जिस पर यू-टर्न लेने के बाद सरकार फंसी हुई नजर आ रही है।

1.  राफेल विमान ने किया वायुसेना को मजबूत

दुनिया की शीर्ष सैन्य क्षमता वाले देशों की सूची में टॉप पर बने रहने के लिए देश को नए लड़ाकू विमानों की जरुरत थी। इन विमानों की खरीद के लिए कांग्रेस सरकार ने साल 2007 में सौदा किया था। कुल 126 विमान खरीद किये जाने के लिए मंजूरी भी दे दी गई। लेकिन उस वक़्त विपक्ष में बैठी बीजेपी ने इस डील में खूब अड़ंगे अड़ाए।

2. कांग्रेस सरकार ने कड़ी परीक्षा के बाद चुना था राफेल विमान

कांग्रेस सरकार ने जब राफेल डील को मंजूरी देने से पहले राफेल विमान का शक्ति परिक्षण भी करवाया था। इस परीक्षण बनाम कम्पटीशन में कुल 6 देशों के लड़ाकू विमानों ने भाग लिया था। सभी विमानों में से राफेल को कांग्रेस सरकार ने हरी झंडी दी थी।

3. कांग्रेस की डील से कई गुना महंगे में किया BJP ने सौदा

कांग्रेस ने कुल 126 विमानों के सौदे के लिए प्रत्येक विमान 428 करोड़ रूपये देने तय किये थे। लेकिन ख़बरों के मुताबिक बीजेपी ने प्रत्येक विमान 1555 करोड़ में खरीदा है। ऐसे में बीजेपी की डील में घोटाले की बू आना स्वाभाविक सी बात है।

4. सौदे की जानकारी देने से पीछे हट रही है बीजेपी

बीजेपी सरकार द्वारा राफेल लड़ाकू विमानों की डील का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। बीजेपी लगातार एक के बाद एक बहाना लगाकर खर्च किये गए पैसों का ब्यौरा देने से बचती आ रही है। गौरतलब है कि यही पार्टी सत्ता में आने से पहले जनता के बीच एक पारदर्शी शासन देने का वायदा करती थी। आज लोगों द्वारा सवाल पूछने पर उन्हें आँखें दिखाई जाती हैं।

निष्कर्ष:

बीजेपी के सत्ता में आने के बाद देश में लूट और भ्रष्टाचार को नई परिभाषा मिल गई है। फर्जी राष्ट्रवाद की आढ़ में देश का चीरहरण हो रहा है। गौरतलब है कि इन चार  सालों के राज में बीजेपी ने देश की हालत सुधारने की जगह बिगाड़ कर रख दी है। 

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