इस वजह से करुणानिधि रखते थे हर वक्त पिली शॉल और काला चश्मा, जानकार हो जायेंगे अचंभित, पढ़ें

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द्रविड़ राजनीति के पुरोधा, पांच बार तमिलनाडु के सीएम रहे करुणानिधि की अपनी अलग शख्सियत थी. 94 साल के करुणा पूर्णतः अनिश्वरीवादी और नास्तिक थें. ईश्वरीय सत्ता में उनका भरोसा नहीं था. करुणानिधि के मुताबिक हारा हुआ और कमजोर इंसान बार बार भगवान की शरण में जाता है, मेरे से यह नहीं हो सकेगा.

करुणानिधि का अपना ड्रेस सेंस था. तन पर सफेद शर्ट और सफेद लुंगी. हर समय काला चश्मा और पीली शॉल रखने वाला करुणानिधि के बारे में लोग अक्सर यह चर्चा किया करते थे कि इसके पीछे कोई तो खास वजह रही होगी. आप जानकर हैरान रह जाएंगें कि करुणा पिछले 46 साल से काला चश्मा पहन रहे थें. इस काले चश्मे के डिजाइन में भी कभी अंतर नहीं आया.

1. 40 चश्मे को रिजेक्ट कर अपनाया था ये काला चश्मा

यह भी काफी हैरत भरी कहानी है. करुणानिधि पढ़ने लिखने के काफी शौकीन थें. वह रात रात भर किताबें पढ़ा करते थें. 1954 से हीं उनकी आंखों में परेशानी आने लगी. इसका उन्होंने काफी इलाज कराया लेकिन आंखों की परेशानी कम नहीं हुई.

इसी बीच 1967 में करुणानिधि का एक्सीडेंट हो गया. पहले से तो उनकी आंखों में खराबी थी ही , इस एक्सीडेंट की वजह से आंखों का हाल एक बार फिर खराब हो गया. अमेरिका के एक अस्पताल में करुणानिधि की आंखों का ऑपरेशन हुआ जिसके बाद उन्हें काला चश्मा पहनने की सलाह दी गई.

डॉक्टरों की सलाह मानते हुए उन्होंने लगभग 40 अलग अलग डिजाइनों के चश्मे को रिजेक्ट कर यह जर्मन स्टाइल चश्मा पसंद किया. इसी डिजाइन ने उनका जिंदगी भर साथ दिया.

2. पीली शॉल की खास वजह

नास्तिक करुणानिधि के पीले शॉल के धारण करने की वजह उनका अंधविश्वास बताया जाता है. कई ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि उनकी राशि ऋषभ थीं. इस राशि वालों के लिए पीला रंग शुभ होता है. एक बार जब इस बात की चर्चा करुणानिधि से की गई तो उन्होंने इसे बकवास बताते हुए खारिज कर दिया लेकिन यह जवाब नहीं दिया कि हमेशा पीली शॉल हीं क्यों ?


करुणानिधि की मौत के साथ हीं पीली शॉल का रहस्य उनके साथ हीं दफन हो गया लेकिन इस रंग को उनकी पार्टी डीएमके ने अपना आधिकारिक रंग बना लिया.

डीएमके के हर मंच पर इस पीले रंग का खूब प्रयोग होता है. उनके समर्थकों के साथ साथ मंच और पंडालों में भी इस रंग का खूब प्रयोग होता है.

निष्कर्ष :

करुणानिधि जो भगवान के अस्तित्व से इंकार करते थें. उनके निधन के बाद उनके समर्थकों ने उन्हें हीं भगवान बना कर पूजना शुरु कर दिया.


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