उच्च न्यायालय की महिला जज ने अपनाया इस्लाम, बताई कुबूल करने की ये वजह...! - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

उच्च न्यायालय की महिला जज ने अपनाया इस्लाम, बताई कुबूल करने की ये वजह…!

“सर्वशक्तिमान ईश्वर ने मुझे सच्ची राह दिखाई जिसके अलावा कोई और सीधा और सच्चा रास्ता नहीं है. मैं जितना ज्यादा इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. के बारे में जानती और समझती गई, मुझे एहसास होता चला गया कि मैं उसी राह पर चल रही हूं जिसकी मुझे तलाश थी और यही वह राह है जहां मुझे होना चाहिए था.”

…ये कहते हुए इंग्लैंड की जानी-मानी महिला जज मैरीलीन मॉरनिंगटॉन ने इस्लाम अपना लिया.

इंग्लैंड की जानी-मानी जज ने अपनाया इस्लाम

जी हाँ मैरीलीन मॉरनिंगटॉन इंग्लैंड में जिला न्यायाधीश ही नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेक्चरर और घरेलू हिंसा व पारिवारिक कानून विषय की प्रसीद लेखिका भी हैं. जिन्होंने साल 1976 में अपनी वकालत की डिग्री हासिल की और 1976 से इंग्लैंड के वरपूल में पारिवारिक कानून से जुड़े मामलों की प्रेक्टिस करने लगी.

40 की उम्र में पहली जज बन रचा इतिहास 

साल 1994 में  40 साल की उम्र में उनकी लिवरपूल के नजदीक स्थित ब्रिकेनहेड शहर में डिस्ट्रिक्ट जज के पद पर नियुक्ति हुई. ये इंग्लैंड में पहली दफ़ा था जब कोई वकील 40 की उम्र में जिला न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हुआ हो. लेकिन मैरीलीन का नाम वल्र्ड एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड सांइस की शोधार्थी के रूप में सामने आया तो मानो हर कोई हैरान हो गया.

महिलाओं और बच्चों पर हिंसा के मामलों पर अध्ययन करते हुए चल पड़ी इस्लाम की राह पर

बता दें कि इंग्लैंड में मैरीलीन घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों की अच्छी जानकार है जिन्हें इस क्षेत्र में काफी सम्मान की नजर से देखा जाता रहा है. वो इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न ओहदों पर कार्यरत्त हैं. इस्लाम अपनाने से पहले उन्होंने करीब 10-12 वर्षों तक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा से जुड़े कई मामलों पर काम किया. इसी दौरान उन्होंने मुसलमानों के बीच जाकर भी महिला और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा पर गहरा अध्ययन किया.

अध्ययन करते हुए मुसलमान सामाज को करीब से जानने का मिला मौका

बताया जाता है कि मुस्लिम समुदाय में इस मसले को बेहतर तरीके से समझने के लिए मैरीलीन ने इस्लाम पर गहरा अध्ययन शुरू किया और वो अपने इसी अध्ययन के चलते मुसलमानों के बीच घुलने-मिलने लगीं. हालांकि सच्चाई का मार्ग नजर आने पर साहसिक कदम उठाकर उसे अपना लेना यूँ तो हर एक के लिए इतना भी आसान नहीं होता.

लोगों की आलोचनाओं के बाद भी मैरीलीन ने नहीं छोड़ी इस्लाम की राह

परिजन और समाज एक लम्बे अरसे तक उनकी राह में रोड़ा बनने का काम करते रहे, लेकिन मैरीलीन का इस्लाम में विश्वास इतना मजबूत था कि इस्लाम अपनाने के अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा. जहाँ उनके द्वारा उठाए जा रहे इस कदम की कई लोग आलोचना कर रहे थे तो वहीँ वो बेहद अभिभूत थी कि ईश्वर ने उसका मार्गदर्शन कर उसको सीधी और सच्ची राह दिखाई.

इस्लाम अपनाने के पीछे बताई ये बड़ी वजह

जानकारी के लिए बता दें कि मशहूर मुस्लिम विद्वान हम्जा युसूफ ने जब जज मैरीलीन मॉरनिंगटॉन से इस्लाम अपनाने के बाद पूछा कि आप मुसलमान क्यों बन गईं तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि…

“मुझे महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध और महिला व बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा के मामलों में दक्षता हासिल है. ब्रिटेन सरकार की पॉलिसी के तहत मैंने दस से बारह वर्षों तक इस क्षेत्र में काम किया. यह मेरी इच्छा नहीं बल्कि मेरे काम की जरूरत थी कि मुझे ब्रिटेन के मुस्लिम समुदाय के बीच महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा का अध्ययन करने के लिए उनके बीच जाना पड़ा, उनसे जुड़ाव बनाना पड़ा. मुस्लिम महिलाओं से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से समझने के लिए मैंने इस्लाम का अध्ययन करना शुरू किया. मैं कुरआन पढऩे लगी और मुसलमानों के बीच घुलने मिलने लगी.”

इस्लाम की राह को नेक बताते हुए जज ने ये भी कहा कि…

“मैं कहना चाहूंगी कि यह मेरे बूते की बात नहीं थी कि मैंने इस सच्चे रास्ते को अपनाया बल्कि यह तो उस सच्चे सृष्टा का मेरे पर करम था कि उसने मुझो सीधी और सच्ची राह सुझाई. रब के उसी मार्गदर्शन के बाद मैं एक के बाद दूसरे शख्स से मिलती गई, ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाती गई और उनसे मिली रहनुमाई का नतीजा है कि आज मैं इस सच्ची राह पर हूं जहां से दूसरा कोई रास्ता नहीं निकलता.”

इस्लाम और मोहोम्मद पर कही दिल छु लेने वाली ये बात…

“मैं इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. के बारे में मैं जितना जानती और समझती गई मेरा यकीन उतना ही बढ़ता गया और मुझे एहसास हो गया कि जो सच्ची राह मेरे लिए होनी चाहिए थी मैं उसी की ओर आगे बढ़ रही हूं और यही मेरे मुताबिक भी सच्ची राह थी.”

इंग्लैंड की महिला जज ने ये भी कहा कि…

“मुझे इस्लाम की पारिवारिक जीवन व्यवस्था, पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की बीवियों और साथियों की जीवनी अच्छी लगी. मैंने आपके (शेख हम्जा) के इस्लाम संबंधी लेख पढ़े, कैसेट्स सुने और इस सबके बाद मुझे पूरा यकीन हो गया कि यही कामयाब जिंदगी है.”

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