फर्जी निकला भाजपा का गौ-प्रेम, कांग्रेस के ज़माने में कहीं ज्यादा अच्छी हालत में थीं ‘गौमाता’

जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है। गौरक्षा के मुद्दे को सबसे प्रमुख दिखाया जा रहा है। बीजेपी गाय के नाम पर लोगों से वोट बटोर चुकी हैं। वहीं अब अगले लोकसभा चुनाव में गाय को प्रमुख रखकर फिर से राजनीति की जाने लगी है। गौरतलब है कि गौरक्षा के नाम पर राज्यों में गौरक्षकों को मासूम लोगों की हत्या का लाइसेंस दे दिया गया है।

1. फर्जी था बीजेपी का गौ-प्रेम

बीजेपी के चार सालों में गौरक्षा के नाम पर कई हिंसक घटनाएं हो चुकी है और कई लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन खुद को गौरक्षा प्रमुख बताने वाली बीजेपी क्या वाकई में गाय की रक्षा के लिए गंभीर हैं। आपको बता दें कि केंद्र में बैठी मोदी सरकार ने गोवंश को बचाने का बजट कम कर दिया है। लेकिन गौरक्षा की दुहाई देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिए जा रहे विज्ञापनों का बजट बीते दो सालों में 10 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि बीजेपी जनता को मूर्ख बना कर हिंसा करवा रही है। क्योंकि बीजेपी इस वक़्त उस मुहावरे पर काम कर रही है: हाथी के दांत, खाने के और, दिखाने के और।

2. विज्ञापनों के जरिये लोगों को बनाया जा रहा मूर्ख

पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग का कम्पोजिट स्कोर जो 2012-13 में 95.48 प्रतिशत था और 2013-14 में 91.97 प्रतिशत था वो 2014-15 में गिरकर 67.14 प्रतिशत हो गया है। जबकि केंद्र सरकार ने इसका विज्ञापन बजट जो 2016-17 में मात्र 59 लाख रुपये था, 17-18 में 2.48 करोड़ रुपये और 18-19 के बजट में फिर से बढ़ाकर 6.36 करोड़ रुपये कर दिया है। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि बीजेपी सरकार का गौ- प्रेम कितना असली है।

निष्कर्ष: गाय का मुद्दा बीजेपी ने अपनी हिंदूवादी राजनीति का अहम हिस्सा बना लिया है। गौरक्षा के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है।

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