अनपढ़ गरीबों की चमक गयी किस्मत… पूरे देश के गरीब परिवारों ने किया धन्यवाद

जैसा सभी जानते हैं कि जब-जब केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है तब-तब इतिहास गवाह हैं कि देश धर्म और दंगों की आग में जला है.

चाहे फिर वो गुजरात दंगे हो, गोरखपुर दंगे हो, गोधरा काण्ड या फिर अयोध्या काण्ड हो..!

हर बार दंगों की आड़ में केवल अल्पसंख्यक नहीं बल्कि भारत के नागरिकों को मौत के घाट उतारा गया.

राजनितिक पार्टियाँ करती रही हैं धर्म की राजनीति

सत्ता से पहले सत्ताधारी बीजेपी और उसके नेता हमेशा देश की एकता की बड़ी-बड़ी बाते करते दिखते थे

लेकिन दुनिया ने देखा वहीं नेता सत्ता में आने के बाद से ही आए दिन विशेष धर्मों को निशाना बनाते हुए अट-पाटे बयान देने से बाज़ नहीं आते है.

लेकिन इन सभी में हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि हम लोग धर्म में बाँट कर एक दूसरे की इज्जत करना ही भूल गए है.

शायद इस बढ़ती नफरत के कारण ही आज हमारे देश का विकास अँधेरे में जाता जा रहा है.

असम के मुस्लिम शक्स ने धर्म को भूलकर दुनियाभर में पेश की मिसाल

ये बात हर नागरिक या यूँ कहिए हर समुदाय भलीभांति जानता हैं कि साम्प्रदायिक तनाव से कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता,

लेकिन फिर इस तथ्य को जीवन में उतारने से उसे उसका झूठा आत्माभिमान रोक देता है.

ऐसे में यह कितना गलत है इसका एहसास हमें उस वक़्त होता है जब धर्म और जाती भुलाकर मानवता आगे आती है.

और इसी का उदाहरण बीते दिनों असम के रहने वाले मुस्लिम शख्स अहमद अली ने दुनिया को देते हुए हर किसी को हैरान कर दिया.

रिक्शा चालाक गरीब अहमद ने कर दिखाया ये कामाल

80 की उम्र पार कर चुके अहमद अली आज अपनी उम्र के इस तकाजे को भी दरकिनार करते हुए दिन-रात मेहनत करने से नहीं झिझकते.

आपको जानकर यकीन नहीं होगा कि पेशे से रिक्शा चालकऔर बेहद  साधारण सी शख्सीयत वाले अहमद अब तक रिक्शा चलाते हुए ही अपने बूते पर 9 स्कूल बनवा चुके हैं.

जी हाँ अहमद अली के लिए आपके मन में इज्जत और भी उस वक्त बढ़ जायेगी जब आपको ये पता चलेगा कि अहमद अली ने ये सभी स्कूल ख़ास तौर से गरीब बच्चों के लिए बनवाए हैं.

अनपढ़ अहमद अली गरीब बच्चो के लिए बने भगवान 

मीडिया से बात करते हुए अहमद बताते हैं कि गरीबी की मार के चलते वो कभी पढ़ाई नहीं कर पाए.

लेकिन गरीबी की बेड़ियां उन्हें कभी रोक भी नहीं पाई और एक बड़े ही प्यारे मकसद के साथ वो कई सालों से अपने जीवन की इस बड़ी कमी को पूरा भी कर रहे है.

रिक्शा चलाकर, कड़ी मेहनत करके और अपनी थोड़ी बहुत सारी जमीन बेचकर अहमद ने गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोले हैं.

जमीन बेचकर और रोज़ाना रिक्शा चलाकर 40 साल में बनवाए 9 स्कूल

शायद उनके इसी कार्य को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी अहमद के इस जज्बे के लिए ‘मन की बात’ में उनका जिक्र और प्रशंसा करने से खुद को नही रोक पाए.

बता दें कि एक रिकॉर्ड कायम करते हुए पिछले 40 वर्षों में अहमद ने अभी तक गरीब बच्चों के लिए 9 स्कूल खुलवाए है.

जिसमें 3 अंग्रेजी स्कूल, 3 प्राइमरी और 1 जूनियर हाई स्कूल शामिल है.

वैसे तो उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी, लेकिन आज उनके इस जज्बे को हर कोई सलाम करता है.

निष्कर्ष

दोस्तों आज अहमद अली के स्कूलों में हर धर्म के बच्चे आते है. खुद मुस्लिम होते हुए अहमद भी हर बच्चे को पढ़ाई का अधिकार दे रहे है. ऐसे में उनके इस कार्य को देख ऐसा ही लगता हैं कि धर्म, जात-पात, गरीबी-अमीरी से कोई भी व्यक्ति बड़ा या छोटा नहीं होता. उसके हौसले उसे सलाम करने के योग्य बनाते है.

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

Leesha Senior Reporter

यह खबर वायरल इन इंडिया के वरिष्ट पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है| खबर में कोई त्रुटी होने पर हमें मेल के द्वारा संपर्क करें- [email protected] आप हमें इस फॉर्म से भी संपर्क कर सकते हैं, 2 घंटे में रिप्लाई दिया जायेगा |
Close