पहले आडवाणी, फिर उनका बेटा और अब बेटी की भी लंका लगा दी भाजपा ने, जाने मामला

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साल 2019 देश के सभी राजनीतिक दलों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इस देश की जनता एक बार फिर यह तय करेगी कि सत्ता में BJP की सरकार बनी रहेगी या फिर विपक्षी दल कांग्रेस की वापसी होगी। गौरतलब है कि बीते साल कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी का जनाधार काफी मजबूत हुआ है।

1. बीजेपी से उठ चुका है लोगों का विश्वास

दरअसल साल 2014 में देश की जनता का विश्वास जिस तेजी से प्रधानमंत्री मोदी पर बना था उसी तेजी से इन 4 सालों में टूट भी चुका है। जिसके चलते साल 2019 के लोकसभा चुनाव के खतरे का अंदाजा बीजेपी को भी लग चुका है। जिसके चलते अब बीजेपी एक बार फिर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर निर्भर होती दिख रही है।

2. पीएम मोदी ने की आडवाणी से बात

खबर सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से बात की है। पीएम मोदी चाहते हैं कि लालकृष्ण आडवाणी साल 2019 में भी गुजरात की अपनी पारंपरिक सीट गांधीनगर से चुनाव लड़े। वहीँ सियासी गलियारों में इस तरह की कयासबाजी भी शुरू हो गई है

कि आडवाणी इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। दरअसल आडवाणी इस वक्त 91 साल के हैं और वह चाहते हैं कि उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी राजनीति में आकर उनका नाम आगे लेकर जाएँ।

3. आडवाणी चाहते हैं राजनीति में आये उनकी बेटी

गौरतलब है कि प्रतिभा आडवाणी अपने पिता के साथ राजनीतिक मामलों में विचार विमर्श करती रहती हैं और कई फैसले लेने में उनकी मदद करती हैं। आपको बता दें कि प्रतिभा आडवाणी इस वक्त सामाजिक मुद्दों को लेकर भी काफी सक्रिय रहती हैं।

दूसरी तरह लालकृष्ण अडवाणी के बेटे जयंत अडवाणी ने भी अपने पिता की परंपरागत सीट गांधीनगर से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। इस संदर्भ में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात भी की है।

4. अमित शाह फेर सकते हैं अडवाणी की उम्मीदों पर पानी

आपको बता दें कि इस वक्त बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात इकाई के लिए लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। इस सन्दर्भ में अमित शाह क्या फैसला लेंगे, ये दखना दिलचस्प होगा। क्योंकि आडवणी अपने बेटे जयंत आडवाणी से ज्यादा अपनी बेटी प्रतिभा अडवाणी की अहमियत देते हैं।

निष्कर्ष:

गौरतलब है कि पार्टी के मार्गदर्शक रह चुके लालकृष्ण आडवाणी इस वक्त पार्टी से साइडलाइन किए जा रहे हैं।  जब से मोदी और शाह की जोड़ी ने बीजेपी की जिम्मेवारी संभाली है तब से ही लालकृष्ण आडवाणी को नजरअंदाज किया जा रहा है।


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