अब मोदी ने भी माना की हाँ मनमोहन ही हैं सबसे अच्छे, अब करेंगे ये बड़ा बड़ा काम

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भारत में नरेंद्र मोदी सरकार का हाल उस नई नवेली बहु की तरह है जो रसोईं में काम कम करती है, चूड़ियां ज्यादा खनकाती है. चूडियां खनका कर परिवार वालों को यह जताने की कोशिश करती है कि मैं काम बहुत ज्यादा कर रहीं हूं, इस चक्कर में वह खाना बनाने में कई तरह की गड़बड़ियां कर बैठती है.

1. लगातार गिरता जा रहा है रुपया

जब कांग्रेस की सरकार में रुपये का अवमूल्यन होता था तो भाजपा कहती थी कि जब रुपया गिरता है तो पीएम की गरिमा गिरती है. स्वयं आज के पीएम मोदी उस दौर में अर्थशास्त्र पर तरह तरह के प्रवचन बांचा करते थें. आज रुपया डॉलर के सामने बुरी तरह से लड़खड़ा रहा है. भाजपा मौन है तो मोदी बदहवास है. कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या करें.

2. मनमोहन के सिवाय कोई रास्ता नहीं

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भारत के हीं दुनिया के महानतम अर्थशास्त्रियों में से एक माने जाते हैं. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बुरी तरह से खाली होता जा रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 427 बिलियन डॉलर से घट कर 400 बिलियन डॉलर के आस पास रह गया है. अब मोदी के सामने मनमोहन के सामने शरणागत होने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा.

3. मनमोहन के बताए रास्ते पर चलेगी मोदी सरकार

यूपीए के सरकार के दौर में जब पूरी दुनिया वैश्विक संकट से गुजर रही थी. उस दौरान भी देश के सामने कुछ ऐसा हीं मामला सामने आया था. मनमोहन ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए 34 मिलियन डॉलर के मूल्य का करंसी स्वैप करने की योजना बनाई थी.

इस योजना के तहत आरबीआई अप्रवासी भारतीयों से सस्ते मूल्य पर डॉलर खरीदती है. इस काम में मनमोहन सरकार ने सफलता पाई थी. मनमोहन के बताए इस रास्ते पर अब मोदी सरकार भी चलना चाहती है.

4. आम आदमी के जीवन स्तर में गिरावट

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से आम आदमी को काफी मुश्किल हालातों का सामना करना पडता है. महंगाई काफी ज्यादा बढ़ जाती है. मध्यम वर्ग और गरीब लोगों का जीवन दूभर हो जाता है.

निष्कर्ष :

विद्या सबसे अनमोल धन होता है. मनमोहन सिंह को पानी पी पीकर कोसने वाले लोग आज उनके बनाए रास्ते पर चल रहे हैं. यह इस बात का प्रमाण है.


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