ज्ञान की बातें- आज सन्डे है और आज छुट्टी भी है, लेकिन क्यों होती है आज छुट्टी ? - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

ज्ञान की बातें- आज सन्डे है और आज छुट्टी भी है, लेकिन क्यों होती है आज छुट्टी ?

सन्डे को छुट्टी क्यों होती है ?

दोस्तों यूं तो हम आप सभी अपनी जिंदगी में कई व्यस्त है, काम और पैसे की तलाश में सभी अपनी जिंदगी से दूर होते जा रहे हैं, शहर में रहने वाले लोगों के बीच यह बात काफी आम हैं। वहीं जब पूरा दिन पूरे हफ्ते काम करने के बाद वीकेंड आता है तो सभी के चेहरे खिल जाते हैं।

संडे को ही क्यों दी जाती है छुट्टी

क्योंकि संडे को ही सबको अपने काम से आराम मिलता है। संडे को लोग घर में आराम करना दोस्तों और परिवार वालों के साथ वक्त बिता पाते हैं।

संडे को न सिर्फ ऑफिस बल्कि स्कूल, कॉलेज. सरकारी दफ्तर सभी जगह छुट्टी होती है। इसलिए सभी को संडे का बेसब्री से इंतजार रहता है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह छुट्टी संडे को ही क्यों होती है?

पूरे हफ्ते को देखें तो भारत में संडे पब्लिक हॉलीडे के तौर पर मनाया जाता है। आखिर क्या वजह थी कि संडे को छुट्टी के दिन के रुप में घोषित कर दिया गया?

जहन में आने वाली संडे की छुट्टी के सवाल का यहां है जवाब

सन्डे या रविवार को छुट्टी के रूप में मनायी जाती है इसकी तो हम सभी को आदत है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे भी एक इतिहास छिपा हुआ है।

जब भारत में ब्रिटिशों का राज था तो उस दौरान मिल के मजदूरों को सातों दिन काम करना पड़ता था, उन्हें किसी भी दिन छुट्टी नहीं मिलती थी।

हर रविवार के दिन ब्रिटिश अफसर चर्च जाकर प्रार्थना करते थे लेकिन मिल मजदूरों के लिए ऐसा कोई रिवाज नहीं था।

ब्रिटिश शासन काल में मजदूरों की छुट्टी को लेकर उठाई गई आवाज

उस समय श्री नारायण मेघाजी लोखंडे मिल मजदूरों के नेता थे, उन्होंने अंग्रेजों के सामने साप्ताहिक छुट्टी की मांग का प्रस्ताव रखा और कहा की 6 दिन काम करने के बाद सप्ताह में एक दिन अपने देश और समाज की सेवा करने के लिए भी मिलना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रविवार हिंदू देवता “खंडोबा” का दिन होता है, इसलिए भी सन्डे को साप्ताहिक छुट्टी के रूप में घोषित किया जाना चाहिए।

लोखंडे के इस प्रस्ताव को ब्रिटिश अधिकारियों ने ठुकरा दिया था। परन्तु लोखंडे ने हार नहीं मानी और अपनी लड़ाई जारी रखी।

आखिरकार 7 साल की लम्बी लड़ाई के बाद 10 जून 1890 को ब्रिटिश सरकार ने रविवार को छुट्टी के दिन के रुप में घोषित कर दिया। हैरानी की बात है कि भारत सरकार ने कभी भी इसके बारे में कोई आदेश जारी नहीं किया।

आइये आपको बताएं कौन है नारायण मेघाजी लोखंडे

श्री लोखंडे को भारत में 19 वीं सदी में कपड़ा मीलों में कार्यप्रणाली में बदलाव के रूप में याद किया जाता है।

ब्रिटिश सरकार के दौरान वह श्रम आंदोलन के एक प्रमुख नेता रहे थे।

भारत में श्री लोखंडे को ट्रेड यूनियन आंदोलन के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

वे महात्मा ज्योतिबा फुले के सहयोगी थे जिन्होंने लोखंडे की मदद से भारत के पहले कामगार संगठन “बांबे मिल एसोसिएशन” की शुरूआत की थी।

भारत सरकार ने 2005 में उनकी तस्वीर वाली एक डाक टिकट भी जारी की थी।

इसका मतलब यह होगा कि श्री नारायण मेघाजी लोखंडे की वजह से ही मजदूरों को रविवार के दिन हफ्ते की छुट्टी, दोपहर में आधे घंटे की खाने की छुट्टी और हर महीने की 15 तारीख को मासिक वेतन दिया जाने लगा था।

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