हम और आप रवीश कुमार से यूँ ही नहीं करते हैं इतना प्यार, जाने इस ईमानदार व्यक्ति की ये बाते…

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रवीश कुमार देश के एक बेबाक और तेज तर्रार पत्रकार हैं जो आज भी उन्हीं मूल्य और सिद्धांतों पर चल रहे हैं।  जिनके साथ उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी। रवीश कुमार को हम हर रोज NDTV के प्राइम टाइम शो में सत्ता पक्ष और उनकी सेवा में लगी मीडिया की सच्चाई जनता के बीच लाते हुए देखते हैं।

1. पत्रकारिता के छात्रों के रोल मॉडल हैं रवीश कुमार

रवीश कुमार के आदर्श और ईमानदारी के साथ साथ उनका बेबाकपन भी पत्रकारिता के छात्रों की के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है। हालांकि रवीश कुमार ये भी स्वीकार कर चुके हैं कि वह पत्रकारिता के इस काले दौर में उन्हें भी काफी डर लगता है। लेकिन इस दौर में भी वह कभी अपने दायित्व से पीछे नहीं हटे। रवीश कुमार को एनडीटीवी के साथ जुड़े एक दशक से भी ज्यादा वक्त हो गया है।

2. देश की असली समस्याओं के मुद्दों पर करते हैं बात

रवीश कुमार का शो प्राइम टाइम देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हैं। तर्क के साथ जनता तक अपनी बात पहुंचाने का उनका तरीका लोगों के दिलों में बस चुका है। जहां मोदी समर्थक मीडिया में हर वक्त हिंदू मुस्लिम और धर्म की राजनीति की खबरें दिखाई जाती हैं। वहीँ रवीश कुमार ने हमेशा प्राइम टाइम में देश के छोटे बड़े मुद्दों और जनता की समस्याओं पर बात की है।

3. गोदी मीडिया पर उठाया बड़ा सवाल

रवीश कुमार ने हमेशा लोगों को देश की असली समस्याओं के साथ अवगत कराया है। हाल ही के वक्त में पत्रकारिता जगत अब सिर्फ गोदी मीडिया बनकर रह गया है, जो पत्रकारों द्वारा नहीं बल्कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा है। इस मामले में रवीश कुमार ने TV स्क्रीन को काला दिखाकर जनता में यह संदेश दिया कि आज पूरा मीडिया जगत बीमार हो चुका है। सवाल उठाने की जगह ये मीडिया फर्जी खबरें बनाकर दिखा रहा है।

4. धमकियों से बिना डरे आगे बढ़ रहे रवीश कुमार

रवीश कुमार का कहना है कि पत्रकारिता अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है और पत्रकारों की विश्वसनीयता सवालो के घेरे में है। रवीश कुमार सरकार के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए अक्सर हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के निशाने पर रहते हैं। उन्हें कई बार सोशल मीडिया पर जान से मारने तक कि धमकियां मिल चुकी हैं। लेकिन वह डर के चलते कभी रुके नहीं बल्कि अपने रास्ते पर निडर होकर आगे ही आगे बढ़ते जा रहे हैं।

निष्कर्ष:

आज के वक़्त में रवीश कुमार जैसे  पत्रकारों की सख्त जरूरी है, जो लोगों को फ़ालतू के मुद्दों में न उलझाएं। बल्कि देश की समस्याओं पर सरकार से सवाल पूछे।


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