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आज से कुछ वक्त पहले तक देश की राजनीति को गंदा समझा जाता था लेकिन देश की राजनीति में नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे महापुरुषों के पर्दापण के बाद मीडिया का चरित्र भी इस कदर गिरा दिया गया कि अब पत्रकारों को लोग भड़वा और दलाल कहने लगे हैं. मीडिया ने पूरी तरह से अपने स्तर को नीचा कर दिया है.

 

अधिकांश न्यूज चैनल और पत्रकार दिन रात सरकार की चरण वंदना में लगे रहते हैं. किस तरह से मोदी और शाह को खुश किया जा सकता है, ऐसी खबरों को मिर्च मसाले लगा कर जनता के बीच परोसा जा रहा है.

पहले पत्रकारों की समाज में बहुत इज्जत होती थी लेकिन आज की तारीख में उनका भाव दो कौड़ी का हो गया है. तकलीफदेह है कि न्यूज चैनल्स देश की मूल समस्याओं पर सरकार से सवाल नहीं पूछ रहे बल्कि आग लगाने वाले और हंगामा खड़ा करने वाले विषयों पर दिन रात डिबेट करा रहे हैं.

डिबेट के बीच हीं मारपीट और गाली गलौज भी हो रहा है. न्यूज एंकर भी निष्पक्ष भाव दिखाने की बजाय भाजपा के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं. इस वजह से एंकर भी पैनलिस्टों से लाइव शो में जूते खा रहे हैं. अमिश देवगन वाला किस्सा आपको याद हीं होगा.

रोहित सरदाना ने स्वरा भास्कर से खाए जूते

हिंदू मुस्लिम डिबेट ब्रांड पत्रकार रोहित सरदान ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले पर सवाल पूछा था कि अब बॉलीवुड अभिनेताओं, अभिनेत्रियों का विरोध कहां चला गया ? इस कांड पर फिल्मी सितारों की तख्तियां कहां गायब हो गई है ? कठुआ कांड पर तो बॉलीवुड बड़ा विरोध कर रहा था.

इस पर सरदाना को चारों ओर से जूते खाने को मिल गए. बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने सरदाना को आईना दिखाते हुए पूछा कि मिस्टर रोहित सरदाना, क्या बॉलीवुड सत्ता में है ? या बॉलीवुड सरकार चला रहा है. ये सवाल सरकार से पूछो न आप !

राजदीप सरदेसाई ने किया पलटवार

देश के जाने माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सरदाना को कहा कि रोहित भाई, हम बॉलीवुड से सवाल पूछे या सरकार से ! बलात्कार की जवाबदेही किसके पास है, बॉलीवुड के पास या सरकार के पास ? क्या इतनी बड़ी घटना को हम इतने हल्के में लेंगें कि सरकार के बजाय बॉलीवुड से उसका जवाब लेंगें. अरे डायरेक्ट सरकार से सवाल पूछो, सरकार से.


निष्कर्ष :

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में रह रही 40 से ज्यादा बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना की पुष्टि हुई है. इसमें सत्ताधारी भाजपा और जदयू के नेताओं के संलिप्त होने की भी आशंका है और भाजपा के दलाल पत्रकार इसका जवाब सरकारी पार्टियां की बजाय फिल्मी सितारों से मांग रहे हैं. बेशर्मी की हद हो गई.

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