सबसे बड़ी पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड पे एक और खुलासा, रवीश कुमार बोले:-.... - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

सबसे बड़ी पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड पे एक और खुलासा, रवीश कुमार बोले:-….

बीते साल पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या करने के बाद से ही उनकी हत्या को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले हर व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है.

पत्रकारिता का असली धर्म पूरा करने वाले पत्रकार नहीं है सुरक्षित

गौरी लंकेश ही अकेली ऐसी पत्रकार नहीं थी जिसे एक खास विचारधारा के तहत मौत के घाट उतार दिया गया. छोटे शहरों में आज भी पत्रकारिता का असली धर्म पूरा करते हुए पत्रकार आए दिन मौत के घाट उतारे जा रहे हैं लेकिन शर्म की बात है कि उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. सरकार भी पत्रकारों की सुरक्षा में कुछ करने को तैयार नहीं है.

गौरी लंकेश की मौत को सांप्रदायिकता का रूप दिया गया

गौरी लंकेश की मौत के बाद सबने देखा कि किस तरह उनकी हत्या को सांप्रदायिकता का रूप दिया जा रहा है. फेक न्यूज़ गढ़ कर मुस्लिम नाम वाले अपराधियों के नाम उनकी हत्या के साथ जोड़े जा रहे हैं. ऐसा ही एक मेसेज बेबाक पत्रकार रविश कुमार के पास पहुंचा. जिसके बाद उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या के आरोप में पकड़ें गये अपराधियों को लेकर जब सवाल किये तो मानो एक बार फिर पत्रकारिता का असली धर्म पूरा होता नज़र आया.

मुस्लिम नाम वाले अपराधियों के नाम लंकेश की हत्या से साथ जोड़े जाने पर रविश कुमार ने किये सवाल 

बता दें कि रविश कुमार ने गौरी लंकेश की हत्या को लेकर लोगों से सवाल करते हुए पुछा. कि…

“गौरी लंकेश की हत्या के आरोप में पकड़ें गये मुस्लिम नाम के सहारे गौरी लंकेश की हत्या के सवाल को जायज़ ठहराने वाले या निंदा करने वालों को अवैध ठहराने वाले की मंशा क्या हो सकती है आप समझ सकते हैं.?” 

इसी पर सवाल करते हुए कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस द्वारा लिखे एक लेख को पढ़ते हुए बताया कि…

“बड़ी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस की ओर से गौरी लंकेश की हत्या के संबंध में पकड़े गए एक अपराधी की ख़बर छपी. मैं इस चरण पर अपराधी को लेकर कोई ठोस राय नहीं रखना चाहता. कई बार पुलिस पकड़ तो लेती है मगर साबित नहीं कर पाती है. इस छूट की गुज़ाइश रखते हुए मेरा सवाल यही है कि आई टी सेल नाम की संस्था और मानसिकता वाले लोग क्यों नहीं उस ख़बर का प्रचार कर रहे हैं.”

इसके आगे रविश ने कहा कि…

“जब वे मुस्लिम नाम वाले अपराधियों के पकड़े जाने की अफवाह का प्रचार प्रसार कर सकते हैं तो माना जाना चाहिए कि उनकी एक मंशा अपराधी को पकड़े जाने में भी रही होगी. अब जब एक अपराधी पकड़ा गया है और वह ख़बर अपराध नहीं है तो उसका प्रचार प्रसार क्यों नहीं हो रहा है. क्यों नहीं लोग अब मुझे या किसी और को गाली दे रहे हैं, चुनौती दे रहे हैं, सवाल गौरी लंकेश का नहीं है, सवाल है ऐसी हर हत्या को जायज़ ठहराने की ख़ौफ़नाक राजनीति का.”

रविश ने इंडियन एक्सप्रेस की ज्योत्सना द्वारा लिखे एक लेख के संदर्भ में बताया कि..

“कर्नाटक पुलिस ने गौरी लंकेश की हत्या के आरोप में कथित रूप से शामिल के नवीन कुमार को गिरफ्तार किया है. मैं अभी भी कथित लिखने की सतर्कता बरत रहा हूं. यह व्यक्ति हिन्दु युवा सेना का कार्यकर्ता है. दक्षिण कर्नट के मद्दुर का रहने वाला है. हत्या के बाद कई महीनों तक यह मोबाइल नेटवर्क से गायब हो गया था. 18 फरवरी को कुमार की गिरफ्तारी हुई है. गौरी लंकेश पर बनी एस आई टी ने उसे हथियार और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है. कुमार ने पुलिस को बयान दिया है कि इस हत्या में हिन्दु युवा सेना मद्दार यूनिट का नेता भी शामिल है.”

कुमार की गिरफ्तारी को लेकर रविश ने आगे बताया कि…

“कुमार के तीन दोस्तों ने पुलिस को बयान दिया है कि कुमार ने गौरी लंकेश की हत्या की बात उन्हें बताई थी. उसने कारतूस से भरा बक्सा दिखाते हुए कहा था कि गौरी लंकेश की तरह एक और बड़ी हत्या करनी है. सीसीटीवी कैमरा में गौरी लंकेश के घर के बार जिस व्यक्ति को मोटरसाइकिल से देखा गया था, उसका हुलिया कुमार से मिलता है. यह भी जानकारी आ रही है कुमार का ग्रुप किस माड्यूल की तरह काम करता था, कर्नाटक के बाहर भी हत्या को अंजाम दे चुका है. फोन रिकार्ड से पता चलता है कि कुमार के संबंध पश्चिम भारत के कई बड़े दक्षिणपंथी नेताओं से संपर्क रहे हैं.”

रविश ने जांच एजेंसियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि..

“भारत में कहीं भी जांच एजेंसी निष्पक्ष और तत्पर नहीं है. सीबीआई का हाल आप देख ही रही है. इस जांच एजेंसी का हाल भी गोदी मीडिया के न्यूज़ एंकर जैसा हो गया है. वह विपक्ष के ख़िलाफ़ आक्रामक तो है मगर सरकार से जुड़े लोगों से पूछने में हालत ख़राब हो जाती है, इसलिए साबित होने तक मैं इसे सिर्फ सूचना के रूप में रख रहा हूं, बताने के लिए कि हम हत्याओं को लेकर कितने हत्यारे हो गए हैं. इज़ इक्वल टू के ज़रिए उस हत्या के बाद के सवालों की हत्या कर देते हैं। गौरी लंकेश की हत्या के सिलसिले में पकड़े गए लोगों की अफवाह को फैला दिया गया और जब कोई पकड़ा गया है तब सब चुप्पी है.”

अपने लेख में रविश ने अंत में देश के तमाम लोगों से अपील करते हुए लिखा कि..

“हर किसी की हत्या की निंदा कीजिए और हर हत्या के ख़िलाफ़ रहिए. जब लिखें तब भी, जब न लिखें तब भी. एक ऐसे सिस्टम की बात कीजिए जो जांच करें. न कि सरकार की जूती सर पर रख कर चले. इसी में हम सबका भला है. हमारी एजेंसिया वाकई जूती उठाने से ज़्यादा की लायक नहीं है. साबित कुछ कर नहीं पातीं, इनके बहाने हम हैं कि मूर्ख बन रहे हैं. सत्ता के साथ होकर या सत्ता से सवाल करके भी.। जिस देश में एक ईमानदार परीक्षा व्यवस्था न हो, उस देश में एक ईमानदार जांच एजेंसी की मांग रेत में गुलाब उगाने के सपने जैसा है.क्या कर सकते हैं. मांग तो करें कम से कम.”

 

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