मीडिया और सरकार की मिलीभगत पर पहली बार खुलकर बोले पुण्य प्रसून बाजपेयी, दिया बड़ा बयान

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हाल ही में देश के जाने-माने न्यूज़ चैनल ABP न्यूज़ के पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। क्योंकि वह अपने मूल्य और सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करना चाहते थे।

ABP न्यूज़ छोड़ कर जा चुके पुण्य प्रसून बाजपेई ने बीजेपी सरकार द्वारा न्यूज़ चैनलों की मॉनिटरिंग की पोल कुछ इस तरह खोली है। उनका कहना है कि मोदी सरकार के दौर में अब मीडिया सरकार की निगरानी नहीं करती बल्कि सरकार मीडिया की निगरानी कर रही है।

1. मीडिया की निगरानी करवा रही बीजेपी

 

दिल्ली में मौजूद सूचना भवन में इस वक्त 200 लोगों की टीम सिर्फ यह मॉनिटर कर रही है कि कौन सा चैनल बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी को कितना कवरेज दे रहा है।

पुण्य प्रसून बाजपेई का कहना है कि बीजेपी ने साल 2014 के बाद मीडिया चैनलों की मॉनिटरिंग करने के लिए बड़ी तादाद में युवाओं की भर्ती की है।

2.  200 लोगों की टीम कर रही मोनिटिरिंग

बीजेपी द्वारा भर्ती की गई ये टीम सूचना भवन में बैठकर दिनभर मीडिया चैनलों की निगरानी कर रही हैं और बीजेपी के उच्च अधिकारियों को यह इंफॉर्मेशन दे रही हैं कि कौन सा चैनल बीजेपी के बारे में सकरात्मक खबरें चला रहा है और कौन सा चैनल नकरात्मक।

दरअसल केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी को लोगों के बीच सिर्फ अपनी अच्छी छवि ही दिखानी है।

3. पीएम मोदी को बस अपनी छवि से है प्यार

जिसके चलते उन्होंने साल 2014 से पहले ही कई मीडिया चैनलों को मोटा पैसा चढ़ाकर खरीद लिया था। ताकि उनके चैनलों पर दिनभर प्रधानमंत्री मोदी ही नजर आ सके।

बीजेपी के सूचना भवन में बिठाए गए इन लोगों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह हर दिन यह रिपोर्ट बनाएं कि कौन सा चैनल प्रधानमंत्री मोदी को कितना दिखा रहा है और उनकी किस तरह की छवि को दिखा रहा है। बीजेपी ने इस संदर्भ में चैनलों की ग्रेडिंग भी करवा रखी है।

4. अच्छे-खासे पैसे देकर खरीदे जा रहे न्यूज़ चैनल

पुण्य प्रसून बाजपेई ने बताया है कि जो मीडिया दिन-रात अपने चैनलों पर मोदी की जय जयकार करता रहता है, उन्हें तो अच्छे खासे पैसे मिल जाते हैं।

लेकिन जो मीडिया पीएम मोदी और बीजेपी की खबरें कम दिखाता है।

उन्हें मॉनिटरिंग कर रही टीम के सदस्य फोन करके पीएम मोदी को अपने चैनलों पर और ज्यादा दिखाने के लिए कहते हैं। पैसे के लालच में अक्सर चैनल वाले भी अपनी साख होकर बीजेपी की दलाली में लग जाते हैं।

निष्कर्ष:

इस वक़्त देश में पत्रकारिता का काला दौर चल रहा है, जिसमें पत्रकारों ने पैसों के लालच में आकर बीजेपी के आगे घुटने टेक दिए हैं।

Story Source: http://thewirehindi.com/53648/narendra-modi-govt-media-censorship-press-freedom-punya-prasun-bajpai/?qt1m4dc=1


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