दर्शकों के लिए खुशखबरी, अब एनडीटीवी पर मोदी की बैंड बजाएंगें वाजपेयी

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जिस दिन से देश भर में यह खबर फैली थी कि वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी की एबीपी न्यूज से छुट्टी कर दी गई है, बुद्धिजीवियों में बेहद निराशा छा गई थी. वाजपेयी भारतीय पत्रकारिता जगत के एक निष्पक्ष चेहरे के रुप में चर्चित हैं. उनकी पत्रकारिता बेहद धारदार और गंभीर होती है.

देश का किसान, मजदूर, नौजवान, खेत खलिहान की समस्या को बेहद संजीदा ढंग से अपने शो के माध्यम से सामने रखते थें.

चाहे आजतक पर उनका शो दस तक हो या एबीपी न्यूज का मास्टर स्ट्रोक, उन्होंने कभी भी अपनी निष्पक्षता पर आंच नहीं आने दीं. बाजारवाद के दौर में भी उन्होंने पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान बनाई. यही कारण था कि पढ़े लिखें लोग उनके कार्यक्रमों का बेहद व्यग्रता से इंतजार करते थें और समय से पहले हीं टीवी सेट के सामने बैठ जाते थें.

1. एनडीटीवी ने किया समय आवंटित

एनडीटीवी की पहचान भी देश के निष्पक्ष न्यूज चैनल्स के तौर पर है. एनडीटीवी सत्ता में बैठे लोगों से आम जनता से जुड़े सवाल दागने के लिए जाना जाता है. चाहे वो सरकार कांग्रेस की रही हो या फिर आज की भाजपा की. एनडीटीवी ने एक बार फिर से अपना राष्ट्रधर्म निभाया है और पुण्य प्रसून वाजपेयी को अपने चैनल में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया है.

वाजपेयी के चहेते दर्शकों के लिए खुशखबरी है कि आने वाले 15 अगस्त है वो एनडीटीवी पर मोदी सरकार की बैंड बजाते दिखेंगें. उनके लिए रात 08 बजे से 09 बजे तक समय तय किया गया है. इस दौरान सरकार को उनके उठाए गए सवालो का सामना करना पड़ेगा.

2. वाजपेयी को किनारे करने के लिए खूब रची गई साजिश

336 सीटों के साथ देश पर राज करने वाली भाजपा, आरएसएस और उनके 56 इंची प्रधानमंत्री का इस एक अकेले पत्रकार ने नाक में दम करके रख दिया. वाजपेयी कुछ नहीं करते थें बल्कि किसानों की बदहाली, रोजगार से जुड़े सवाल आंकड़ों के साथ सरकार के सामने रखते थें. उधर सरकार को लगता था कि वाजपेयी हमारी पोल खोल रहे हैं.

 

उन्हें हर तरह से प्रताड़ित करने की कोशिश की गई. उन पर दबाव बनाया गया. शो रोकने के लिए पीएमओ से कॉल आने लगें. जिस समय में एबीपी न्यूज पर मास्टर स्ट्रोक शुरु होता तो रहस्यमयी तरीके से सिग्नल गायब कराया जाने लगा. वाजपेयी ने फिर भी हार नही मानी. इसके बाद एबीपी मैनेजमेंट पर दबाव बना केंद्र में बैठी रांगा बिल्ला की जोड़ी ने उनकी हमेशा के लिए छुट्टी करा दी.

निष्कर्ष :

पूरा देश जहां सरकार और मीडिया से हताश और निराश हो चुका है. वहीं एनडीटीवी जैसे न्यूज चैनल, रवीश कुमार, पुण्य प्रसून वाजपेयी और अभिसार शर्मा जैसे पत्रकार उम्मीद की किरण है. उन्हें देख कर लोगों को लगता है कि देश फिर अपने अमन चैन, मोहब्बत और भाईचारे के दौर में लौटेगा.


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