VIDEO- बदतमीज़ी पर उतरी अंजना ओम कश्यप, भुला दिए पत्रकारिता के सारे उसूल

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देश में मीडिया सत्ता की गोद में खेल रहा है। ये मीडिया गोदी मीडिया है। अंग्रेज़ी में इसे एम्बेडेड जर्नलिज़्म कहते हैं। टीवी के ज़रिये आपकी धारणा को नियंत्रित किया जा रहा है।

आखिर क्या बात है कि दो चार मुद्दों के आस पास ही तमाम चैनल साल भर बहस करते हैं। देश भर में टीवी को मैनेज करना अब सरकार और चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

मोदीभक्त अंजना ओम कश्यप बीजेपी के खिलाफ एक शब्द नहीं सुनती

 

इसमें से एक आज तक की रिपोर्टर अंजना ओम कश्यप है।

जिनसे लगभग हर सभी लोग परिचित हैं। आजतक के हल्ला बोल में अंजना अपने चिरपरिचित अंदाज से दलों के प्रवक्ताओं की बोलती बंद कर देती हैं। खासतौर पर जब बात बीजेपी की खिलाफ की जा रही हो तो।

खुद को बता चुकी है अंजना ओम मोदी

 

अंजना ओम कश्यप गोदी मीडिया में अपना अहम रोल बखूबी निभाया है।

आपको बता दें कि यह अंजना ओम कश्यप वही है। जिन्होंने अपना नाम लेते लेते लाइव कार्यक्रम में अंजना ओम मोदी का उच्चारण कर दिया था। इनकी भक्ति बीजेपी और मोदी के लिए बहुत ही विशालकाय है

 विपक्षी दलों के नेताओं से करती हैं बदतमीजी

 

साल 2014 से मोदी की सरकार बनने के बाद अंजना की तरफ से विपक्षी दलों के प्रवक्ताओं से अभद्र भाषा में बातचीत करना गाली गलौज करना इनकी आदत में आ चुका है।

यह भक्ति में इतना खो चुकी है कि सामने बैठे अलग दल के सम्मानित प्रवक्ताओं से बेहद घटिया तरीके से प्रश्न पूछना। फिर उनके जवाब से पहले ही उनपर हावी होना अंजना का काम बन गया है।

सीएम अरविन्द केजरीवाल को अंजना ने कहा था अराजकतावादी

 

आपको बता दें एक बार TV प्रोग्राम पर अंजना ओम कश्यप ने आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान से कहा कि-

“केजरीवाल ने कहा है कि वह अराजकतावादी है” यह उनके सवाल देश प्रेम के लिए हैं, इस बार आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता खेतान ने कहा की’ महात्मा गांधी भी खुद को अराजकतावादी कहते थे।

आप नेता से कहा तुम्हारी औकात नहीं यहाँ बैठने की

 

आशीष खेतान पर भड़की अंजना ओम कश्यप ने बड़े गंदे तरीके से उन्हें कहा की “आप की औकात नहीं है ऐसे सम्मानित चैनल पर बैठने की”.

इससे आप अंदाजा सकते हैं कि आज गोदी मीडिया किस तरीके से विपक्षी दलों पर बदतमीजी से और उनके प्रवक्ताओं पर बेहद घटिया तरीके से बातचीत करती है।

देखिये वीडियो:-

गौरतलब है की इस वक़्त मीडिया का पतन हो रहा है। कुछ ऐसे पत्रकार है जो इस सरकार में अपने आप को सरकार की गोद में बिठा चुके हैं।


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