पुण्य प्रसून के जाते ही सही आने लगा एबीपी न्यूज़ का नेटवर्क… पढ़िए पूरी खबर

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इस वक्त सोशल मीडिया से लेकर संसद तक का एक ही मुद्दा छाया हुआ है।  वह है एबीपी न्यूज़ से दो पत्रकारों का इस्तीफा देना और चैनल द्वारा एक पत्रकार को छुट्टी पर भेज देना।

इन तीनों पत्रकारों की नौकरी खतरे में पड़ने का कारण सिर्फ एक है कि इन्होंने मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ रिपोर्टिंग की।

यह सारा मामला मोदी सरकार से जुड़ा हुआ है क्योंकि बीते महीने प्रधानमंत्री मोदी ने नमो ऐप से सरकारी योजनाओं को लेकर किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी।

जिसमें छत्तीसगढ़ की एक महिला ने पीएम मोदी से बात करते हुए कहा कि उनके राज में किसानों की आमदनी दोगुनी हो गई है।

1. मास्टर स्ट्रोक पर उजागर हुआ था बीजेपी का सच

 

इसके बाद ABP न्यूज़ के पूर्व वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने इस मामले की सच्चाई को उजागर किया कि महिला ने ये बयान सरकार के कुछ अधिकारियों के कहने पर दिया था। बस इसी झूठ का पर्दाफाश करने की सजा पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी को दी गई।

2. चैनल पर मोदी सरकार का दबाब

सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट के बाद चैनल पर सरकार द्वारा उनके खिलाफ रिपोर्टिंग ना करने का दबाव बनाया जा रहा था।

इसके साथ ही बीजेपी के कुछ मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर चैनल के खिलाफ ट्वीट किया था और भगवा ब्रिगेड ने चैनल के खिलाफ की तरह की अफवाहें फैलाने की कोशिश की।

3. मोदी सरकार की गलत नीतियों के सामने नहीं झुके पत्रकार

इसके बाद भी जब पत्रकार प्रसून ने बीजेपी के आगे घुटने नहीं टेके तो बीजेपी ने चैनल के सिग्नल उड़ाने की चाल चली। जिसके चलते रात 9 बजे यानी मास्टर स्ट्रोक के प्रसारण के वक़्त चैनल के सिग्नल चले जाते थे।

जिसकी शिकायत कई लोगों ने चैनल तक पहुंचाई। लेकिन चैनल ने मोदी सरकार के दबाब के चलते मास्टर स्ट्रोक बंद करने का फैसला लिया।

4. गोदी मीडिया में शामिल होने के बाद ठीक हुए सिग्नल

 

वहीँ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एबीपी से इस्तीफा दे डाला है। जिसके बाद अब चैनल के सिग्नल भी ठीक आने लगे हैं। अब चैनल पर गोदी मीडिया पत्रकार अपने आका के कसीदे पढ़ते हुए नज़र आ रहे हैं।

वहीँ सरकार ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा है कि पत्रकारों को नौकरी जाने के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है। ये सारा मामला चैनल की गिर रही टीआरपी से जुड़ा है। क्योंकि चैनल पर झूठी खबरें दिखाई जाती हैं।

निष्कर्ष:

इस वक़्त पत्रकारिता जगत हाशिये पर आ गया है। इसके साथ ही ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकारों का नौकरी से लेकर जान का खतरा बना हुआ है।


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