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देश अघोषित आपातकाल के मुहाने पर पहुंच चुका है. भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खंभा माना जाता है. केंद्र में बैठी रांगा बिल्ला की जोड़ी इस खंभे को पूरी तरह से ध्वस्त करने पर आमादा है. मीडिया को नियंत्रित किया जा चुका है.

जो पत्रकार और चैनल सरकार की चाटुकारिता कर रहे हैं, उन्हें पैसे और सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है, सिक्योरिटी दी जा रही है और जो जनता से जुड़े मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं, उन्हें कालापानी की सजा दी जा रही है.

1. एबीपी न्यूज पहुंचा बिकने के कगार पर

एबीपी न्यूज काफी दिनों तक तो आलोचनात्मक पत्रकारिता करता रहा और सरकार से लड़ता रहा लेकिन रांगा बिल्ला की साजिश कामयाब हुई और उसने भी एक दिन दम तोड़ दिया. सबसे पहले तो जाने माने पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी और अभिसार शर्मा की छुट्टी की गई और उसके बाद उन्हें नियंत्रित करने की कोशिशें शुरु हो गई.

खबर आ रही है कि एबीपी न्यूज के मालिक अविक सरकार ने इसे बेचने का मन लिया है. वो सरकार की साजिशों से तंग आ चुके हैं.

2. मोदी का चहेता है खरीददार

एबीपी न्यूज को खरीदने के लिए जिस उद्योगपति का नाम सामने आ रहा है, उसका नाम संजीव गोयनका है. संजीव गोयनका आरपीजी संजीव ग्रुप का चेयरमैन है.

संजीव गोयनका का भाजपा और संघ के बड़े बड़े नेताओं के साथ उठना बैठना बताया जाता है. फिलहाल गोयनका 4000 करोड़ रुपये के विशाल बिजली कंपनी के मालिक हैं.

इसके अलावा भी उनके पास एक भाजपा समर्थित अखबार का स्वामित्व है. ऐसे में अगर एबीपी न्यूज उनके हाथ में चला जाता है तो देश को एक और जी न्यूज टाइप चैनल देखने को मिल सकता है.

3. रवीश कुमार को अकेले संभालना होगा मोर्चा

एबीपी न्यूज के भी गोदी मीडिया की फेहरिश्त में शामिल हो जाने के बाद से एनडीटीवी और रवीश कुमार को अकेले मोदी सरकार से लोहा लेना पड़ेगा. ऐसा नहीं है कि रवीश कुमार सीधे सीधे सरकार की आलोचना करते हैं.

उनकी पत्रकारिता की यह खासियत है कि वह अपने अंदाज में सरकार से गांव, गरीब, किसान, मजदूर, छात्र, नौजवानों की समस्याओं पर बात करते हैं और सरकार के दिए हुए आंकड़ों से हीं उन्हें घेरने का प्रयास करते हैं.

आजकल न्यूज चैनल्स पर जिस प्रकार की हिंसक और सांप्रदायिक मुद्दों की राजनीति हो रही है, एनडीटीवी और रवीश कुमार बेहद अलग है और जनमानस से जुड़े मुद्दों को बेहद संजीदगी से जनता के बीच रखते हैं.

निष्कर्ष :

तानाशाही कभी भी स्थाई नहीं होती है. मोदी और शाह को शायद यह लग रहा है कि वो अमर हैं, अपराजेय हैं. उनका यह भ्रम जल्द हीं दूर होगा.

source: https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/live+samachar+hindi-epaper-livesam/bikane+vala+hai+abp+nyuj+ye+honge+ab+naye+malik+godi+midiya+ki+suchi+me+judane+vala+hai+ek+aur+nam-newsid-93864605

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