VIDEO- संजय सिंह ने जैसे ही अमित शाह का नाम लिया, नेहा पन्त का हाल देखने लायक था ….

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भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहा जाता है. इस लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता था भारत की निष्पक्ष एवं निर्भिक मीडिया को.

पिछले 05 सालों में लोकतंत्र के इस खंभे को नेस्तनाबूद करने की कोशिशें हो रहीं है. यकीन मानिए, अगर ऐसा होता है तो भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे नहीं कर पाएगा.

 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत को भूत सवार हो गया है कि जैसे भी हो, मीडिया को अपने नियंत्रण में रखों. दुनिया क्या बोलती है, उसकी कोई परवाह मत करो.

एक बार मीडिया हमारी जेब में आया तो वो वही बोलेगी, जो हम चाहेंगें. अपनी इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए मीडिया समूहों पर अनैतिक तरीके से दबाव बनाया जा रहा है.

संजय सिंह ने की एबीपी न्यूज की बोलती बंद

 

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एबीपी न्यूज ने एक खबर चलाई की आप के नेता सह पंजाब प्रभारी संजय सिंह और सह प्रभारी दुर्गेश पाठक ने टिकट के लिए उम्मीदवारों से पैसे लिए हैं.

देखिये वीडियो:-

यह आरोप पार्टी के एक विक्षुब्ध नेता हरदीप सिंह किंगरा ने लगाई थी. इस पर एबीपी न्यूज ने आप नेता संजय सिंह से यह सवाल किया कि क्या आप पर जो आरोप लगे हैं, वो सही है ?

संजय ने एंकर नेहा पंत से पूछा कि–  इसके पहले भी आपने आम आदमी पार्टी के खिलाफ झूठी खबरें चलाई थी, उस पर आप माफी मांगेगी या नहीं ….?

एंकर नेहा पंत बात इधर उधर करती रही लेकिन अंत तक जवाब नहीं दे पाई.

संजय बार बार अपने सवाल दोहराते रहें, जवाब नहीं मिला.

इस पर संजय सिंह ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर आरोप लगा है कि उन्होंने मोतीलाल सोनकर नामक व्यक्ति को पैसे लेकर कानपुर से पार्टी का टिकट दिया है. क्या यह आरोप अपने चैनल पर चलाएंगें. अगर आपकी हिम्मत है तो यह खबर चला कर दिखाइए, अगर आपका चैनल बंद नहीं हो गया तो….

गोदी मीडिया की कतार में शामिल होता एबीपी न्यूज

देश के लोगों का न्यूज चैनल्स से लगातार भरोसा कम होता जा रहा है. सवाल पूछने की बजाय अधिकांश मीडिया हाउस सत्ताधारी दल की चरण वंदना में जुटे हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान का भाई घोषित करने की होड़ सी मची हुई है.

सरकार से सवाल पूछने के एवज में एबीपी न्यूज ने अपने वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी की हमेशा हमेशा के लिए छुट्टी कर दी है और पुराने सहयोगी पत्रकार अभिसार शर्मा को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया है.

निष्कर्ष :

 

एबीपी न्यूज ने भी अन्य गोदी मीडिया की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया है. इस वजह से दर्शक उससे लगातार दूर होते जा रहे हैं. इतना हीं नहीं, एबीपी न्यूज की टीआरपी ने बुरी तरह गिरावट दर्ज की गई है.


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