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सामान्य ज्ञान— मौजूदा समय में मुस्लिम देश यमन धरती पर नर्क बन चुका है, तस्वीरें देख रूह कांप जाएगी आपकी

वायरल इन इंडिया संवाददाता -
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यमन में लगातार बिगड़ रहे हालातों को लेकर दुनियाभर के देश काफी चिंतित हैं। आज वहां की स्थिति ऐसी हो गई है कि इंसानों का वजूद भी कहने पर डर का अहसास होता है।

यमन के हालात दिन प्रतिदिन इस कदल बिगड़ते जा रहे हैं कि वहां के हालातों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि इंसानों की सभ्यता पर यह काफी बुरा वक्त है।

यमन में बिगड़ते हालात

बदकिस्मती से यमन के बकसूर व मासूम लोगों के हालातों पर बाकी पुरी दुनिया एक साथ नहीं आना चाहती उनकी हिफाजत के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहती।

कहीं न कहीं यह कहा जा सकता है कि यमन के लोगों की मदद के लिए पश्चिमि देश की ताकते पूरी तरह से सामने नहीं आना चाहती हैं।

यमन के इन हालातों के लिए कहा जाता है कि उस पर यह कहर सऊदी अरब और उसके सहयोगियों द्वारा किया जा रहा है।

पश्चिमि ताकतों का है हाथ

यह न केवल यमन बल्कि अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम सहित पश्चिम के असंतोष को शांत करने का भी वित्तीय जरीया है। जिससे साफ है कि यू.एस. और यू.के. यमन की जमीन पर नरसंहार का समर्थन कर रहे हैं।

यह सब न केवल सऊदी के गठबंधन को आर्म्स की सुविधा पहुंचाने के साथ किया जा रहा है बल्कि जमीनी स्तर पर उन्हें सैनिक सहायता भी दी जा रही है।

आज यमन में जिंदगी की कल्पना करना भी एक मुश्किल चुनौती बन गया है, लेकिन इन मुश्किल हालातों पर भी मजबूर लोगों को वहां जिंदगी गुजारनी पड़ रही हैं।

वहां जूझ रहे लोगों की जिंदगी का कोई भरोसा नहीं कि उन्हें अगली सुबह देखने को भी मिलेगी या नहीं। क्योंकि अंतराष्ट्रीय राजनीति पर भी हालात ऐसे हो गए हैं कि एक दूसरे की चापलूसी करने के चक्कर में इंसानियत के लिए अपनी आवाज कोई नहीं उठाना चाहता है।

दुनिया को साथ आकर यमन की मदद करने की है जरुरत

वहीं दूसरी तरफ देखें तो यमन के इन हालातों की वजह चाहे जो भी हो, दुनिया को इस बारे में सक्रिय होकर साथ आने की जरुरत है।

यमन के मासूम व बेकसूर लोगों के लिए यह समझने की जरुरत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की ट्वीट अकाउंट से ज्यादा जरुरी है इस धरती पर रहने वाले लोगों की रक्षा।

यमन की धरती पर साल 2015 से ही हालात बिगड़ने के बाद संघर्ष शुरु हो गया था, जिसके बाद से ही हजारों लोगों की जानें गई।

यमन की धरती पर जिंदगी कर रही है संघर्ष

कितने ही लोग बुरी तरह जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे, अपंग हो गए जान बचाकर भागने वाले विस्थापित हो गए।

आपको बता दें कि अप्रैल से ही 1,800 यमनी चोलेरा से मारे गए हैं और लगभग 370,000 लोग इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यह आंकड़ा 600,000 तक बढ़ने की संभावना है।

यहां हम आपको यमन में की जा रही तबाही और इंसानों पर हो रहे हमले की तस्वीरें दिखा रहे हैं।

आज दुनिया इंसानों की सभ्यता पर हो रहे इस बड़े हमले पर चुप्पी साधे बैठी है।

कहीं न कहीं इन हालातों के पीछे सऊदी अरब की मदद करने के लिए अमेरीका को ही जिम्मेदार बताया जा रहा है।

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