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याक़ूब मेमन जिसे दुनिया आतंकवादी समझती है और उसे फांसी भी दे दी गयी ! पर वो शख्स अपने अंतिम समय तक भी जब तक कि उसे फांसी पर नहीं लटका दिया गया और पुलिस वालों के ये कहने पर भी कि कबूल करो तुम गुनहगार हो यही कहता रहा कि वो बेगुनाह है ! उसने अंतिम समय जो कहा और किया वो किसी को भी पता नहीं पर हम आपको बतायेंगे !

जेल में मौजूद ऑफिसर ने क्या कहा

जेल में मौजूद एक अधिकारी ने ये सारी बातें बताते हुए कहा कि याक़ूब मेमन रात को लगभग दो बजे सोए ! सुबह जल्दी ( 3 बजे ) उठने के लिए तीन बार उनको आवाज़ दी गयी ! जब वो सुबह उठे उन्होने फज्र की नमाज़ अदा की , उसके बाद उन्हे गरम पानी नहाने को दिया गया जिसमें गुलाब जल भी मिक्स था ! नहाते हुए भी वो ज़िक्र और अज़कार कर रहे थे ! फिर डॉक्टर ने उनका ब्लड प्रेशर चेक किया जो नॉर्मल था ! उसके बाद जेलर और 3 कॉन्स्टेबल उनको फाँसी वाली जगह ले गये उन्होने उस वक़्त भी कहा मैं बेगुनाह हू और ये ना इंसाफी है !

फांसी से कुछ देर पहले क्या कहा

फाँसी से कुछ देर पहले एक बार फिर उनसे अपने जुर्म का इक़रार करने और उसकी माफी माँगने को कहा मगर उन्होने उस वक़्त भी यही कहा की मैं बेगुनाह हूँ ! उसके बाद याक़ूब भाई ने क़ुरान करीम के सुरह हज्ज की आयात 66 तिलावत की
وَهُوَ الَّذِي أَحْيَاكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۗ إِنَّ الْإِنسَانَ لَكَفُورٌ जिसका मतलब ये है कि वही तो (अल्लाह ) है जिसने तुमको ज़िंदा किया , फिर तुम्हे मारेगा फिर तुम्हे ज़िंदा करेगा बेशक इंसान बड़ा ही नाशुक्रा है – अल क़ुरान सुरह हज्ज (22) : 66

चेहरे को कपडे से ढकते वक़्त क्या फरमाइश की

उसके बाद उन्होने कहा की किसी भी इंसान को तब तक मौत नही आ सकती जब तक अल्लाह सुबहानहु की मर्ज़ी ना हो और असल इंसाफ़ अल्लाह सुबहानहु की अदालत में मिलेगा , वही सबसे बड़ा सुप्रीम है ! याक़ूब भाई के चेहरे को कपड़े से ढंकते वक़्त उन्होने कहा था की उन्हे कुछ देर के बाद ( यानी सूरज निकालने के बाद ) फाँसी दी जाए , जो हमने इनकार कर दिया क्यूंकी फाँसी सूरज निकलने से पहले ही दी जाती है

जब गले में फांसी का फंदा कसा जा रहा था तो क्या कहा याक़ूब ने

फिर याक़ूब भाई ने ये कहा की अल्लाह सबसे बड़ा है , वो हर चीज़ को जानने वाला है , मैं बेगुनाह हू और मुझे पोलिटिकल साज़िश के तहत फाँसी दी जा रही है !जिस वक़्त उनके गले में फाँसी का फंदा कसा जा रहा था वो ज़ोर ज़ोर से अल्लाहू अकबर , अश्हदु अल्ला इलाहा इलअल्लाह वा अश्हदु अन्ना मुहम्मद रसूल अल्लाह पढ़ रहे थे (जिसको जेलर ने अल्लाह का नाम कहा है) , जेलर ने कहा की वो ज़रा भी बेरूख़ी और गुस्सा नही दिखा रहे थे

क्या थे आखिरी अल्फाज़

जिस वक़्त फाँसी का लीवर खींचा गया उस वक़्त भी वो ज़ोर ज़ोर से अल्लाह का ज़िक्र और कलमा दोहरा रहे थे और उनकी ज़ुबान से निकलने वाला आखरी अल्फ़ाज़ अल्लाह था ! इन्ना लिल्लही वा इन्ना इलैही राजेउन ( बेशक हम अल्लाह के लिए हैं और उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं )

और इस तरह एक बेगुनाह को इस आर.एस. एस. की भगवा सरकार ने क़त्ल कर दिया और हम कुछ ना कर सके ! बस हमको तो अपस में झगड़ा करना आता है हमेशा एक दूसरे मे ही उलझे रहते हैं मगर बेगुनाहो को क़त्ल करते वक़्त ये भगवा आतंकवादी कभी नही पूछते की तेरा मसलक या फिरक़ा क्या है वो तो सिर्फ़ ख़ास साम्प्रदाय को टारगेट करते हैं ! अब भी ना समझोगे तो मिट जाओगे मेरे दोस्र्तों…… तुम्हारी दास्ताँ तक ना रहेगी दस्तानों में ! मेरे अज़ीज़ो ज़ुल्म के खिलाफ जितनी देर से उठोगे , उतनी ही ज़्यादा क़ुर्बनिया देनी पढ़ेंगी !

--- ये खबर वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है वायरल इन इंडिया न्यूज़ पोर्टल के लिए

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