भारतीय मीडिया की वजह से देश हुआ शर्मसार, विश्व आर्थिक मंच ने मुँह पे मारा करारा तमाँचा…पढ़े

शेयर करें

यूँ तो पत्रकारिता को देश के लोकतंत्र का चौथा सबसे मजबूत स्तंभ कहा जाता हैं और पत्रकार को इस स्तंभ की ताकत.

लेकिन आज देश में जिस तरह पत्रकार और तमाम मीडिया पत्रकारिता का अपना धर्म भूलकर व्यक्ति विशेष की मदद में लगे हुए और फ़र्जी खबरों को फैलाते हुए लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं वो देश के लिए बेहद शर्मनाक है.

शायद इसी चलते आज लोगो का मीडिया पर से भरोसा उठ चुका है.

वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम ने भारतीय मीडिया की कर दी फरजिहत

जी हाँ ऐसा हम नही बल्कि वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम का एक सर्वे बोल रहा है.

दरअसल कुछ समय पहले वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम ने एडेलमन कंपनी द्वारा 28 देशो में एक अनोखा सर्वे कराया था.

जिसमें ही लगभग 17 देशो ने मीडिया पर अपना अविश्वास जताते हुए ऐसा खुलासा किया जिसके चलते अब भारत को दुनिया के सामने शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है.

बता दें कि इस सर्वे में दुनियाभर के देशों की मीडिया को लेकर कई खुलासे हुए थे जिसमें भारतीय मीडिया का नंबर सबसे भ्रष्ट सूचि में आया.

इस सर्वे में जारी रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि भारतीय मीडिया अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो चूका है.

साथ ही सोशल मीडिया के उभरते ही भारतीय मीडिया फेक न्यूज़ और लोगो को गुमराह करने का काम जोरो-शोरो से करने में लगा है.

पत्रकार राजनितिक पार्टियों के हाथो बिक चले है

दरअसल जिस कंपनी द्वारा ये अनोखा सर्वे किया गया है वो मीडिया बिज़नस के क्षेत्र में लगभग पिछले 20 साल से भी ज्यादा समय से सक्रीय है.

ये कंपनी दुनियाभर में 38 देशो में अपना बिज़नस कर रही है जिसके चलते भी इसकी प्रमाणिता पर सवाल नही उठाए जा रहे है.

सर्वे की माने तो सोशल मीडिया के आते ही भारतीय मीडिया का पाखंड और उजागर हुआ है.

जिससे जो भी लोग आज खुद को पत्रकार बता रहे है हकीकत ये हैं कि वो लोग अपने थोड़े से फ़ायदे के लिए राजनीतिक दलों के पीआर एजेंट बनकर रह गये है.

भ्रष्ट मीडिया में भारत का नंबर हैं दूसरा

इस सर्वे में ये भी बताया गया हैं कि,

“विभिन्न देशो के लोगो ने मीडिया पर अपना असंतोष ज़ाहिर किया है. जिसके चलते वो उन देशों की मीडिया के जरिये दी गई खबरों पर अब भरोसा नही करते है.”

और बेहद शर्म की बात हैं कि भ्रष्ट मीडिया की सूचि में भारत दुसरे नंबर पर शामिल है.

इसको लेकर लोगो ने सर्वे में कहा कि कई देशों का मीडिया अपने स्वार्थो और अपनी टीआरपी जुटाने के लिए अफवाहे फैला रहा है.

इस सर्वे पर अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए रिचर्ड एडलमैन (Richard Edelman) ने कहा है कि,

“आजकल लोग मीडिया को कॉरपोरेट मशीन और कुछ खास वर्ग के लोगों तक सीमित ही समझते हैं. कभी लोगों के विचारों और मजलूमों की आवाज बना मीडिया आज अमीर और प्रभाशाली लोगों से प्रभावित है और इससे लोगों का मीडिया के प्रति भरोसा कम हुआ है.”

सर्वे में हुआ JNU मामले का भी जिक्र

रिचर्ड द्वारा इस ख़ास सर्वे की रिपोर्ट में जेएनयू वाले मामले का भी ज़िक्र किया गया था.

बता दें कि रिपोर्ट में JNU मुद्दे पर बोलते हुए कहा गया कि,

“इस बात के पुख्ता सबूत है की भारत में फर्जी खबरें (fake stories) फैलाने के लिए मीडिया और कुछ अन्य लोग जिम्मेदार हैं.”

सर्वे में आगे कहा गया हैं कि आज तमाम न्यूज़ चैनल एक तरह से गॉसिप बॉक्स में तब्दील हो चुके है जो अहम खबरों को न दिखाते हुए मनोरंजन का काम कर रहे है. ऐसे में जब भी रात को लोग खबरें सुनने के लिए टीवी के आगे बैठते है तो बेकार के शोर से ज्यादा उन्हें कुछ सुनाई नहीं देता. वास्तव में अहम मुद्दा कही आज खो सा गया है.

निष्कर्ष

वाकई आज हमारे देश में मीडिया की जो छवि हो चली हैं उसपर आम आदमी विश्वास करने से डर रहा है. आज मीडिया चैनल अपने फ़ायदे के लिए जिस तरह फ़र्जी खबरे फैलाते हुए अलग-अलग धर्म को मुद्दा बनाने का काम कर रहे हैं उससे विश्व स्तर पर देश की छवि बेहद खराब होती नज़र आ रही है.

story source: https://postcard.news/must-read-world-economic-forum-releases-survey-indian-media-results-shameful/


शेयर करें

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े