क्यों सऊदी अरब में हैं इतने सारे प्रिंस, जानें सऊदी के इतिहास के साथ पूरा सच

सऊदी अरब हमेशा से ही अपने अलग नियम व कानूनों के लिए जाना जाता है। वहां के लोगों का रहन सहन बाकी सभी देशों से काफी अलग देखने को मिलता है। सऊदी अरब की जब बात आती है तो एक बात और गौर करने वाली सामने आती है कि हमने वहां प्रिंस यानी शहजादे का चलन देखा है।

आज यहां हम आपसे सऊदी अरब के इस अलग और दिचसस्प संस्कृति के बारे में चर्चा करेंगे।

आपको बता दें कि सऊदी में आज भी बहु पतनी विवाह की संस्कृति है।

आपको बता दें कि सऊदी के तीसरे राज्य के पहले राजा, अब्दाल्जिज बिन अब्दुल रहमान अल सउद (इब्न सऊद) की 32 रानियां थीं। जिनसे उन्हें 53 बेटे और 36 बेटियां हुई थी।

अब उन्हीं से जन्में हैं 89 राजकुमार और राजकुमारियां

सऊदी के दूसरे राजा (सऊद बिन अब्देलज़ीज़ अल सऊद), जो कि 53 बेटों में से एक हैं। उनकी खुद के ही 53 बेटे और 56 बेटियां थी।

सऊदी के दूसरे राजा सऊद बिन अब्देलजीज के उत्तराधिकारी फैसल के भी कम से कम 18 बच्चे थे, जो कि सामान्य परिवार के तुलना में देखे तो काफी ज्यादा है।

इसी तरह से चला आ रहा है अब तक

मौजूदा समय पर भी गौर करें तो किंग सलमान का ही परिवार देख लीजिए। किंग सलमान के ही 13 बच्चे हैं। जिनमें एक मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद क्राउन प्रिंस हैं।

इस तरह से देखा जाए तो इससे अब्देलजीज के सैकड़ों में नाती व पोतियां हैं।

फ्रांसीसी वीकीपीडिया के मुताबिक बताएं तो अल सऊद के लगभग 500 के करीब नाती पोते हैं।

यहां तो यह भी नहीं कहा जा सकता कि अब्देलजीज को कोई फैमिली ट्री होगा, जिससे उनकी पूरी पीढ़ी का पता लगाया जा सके।

अब तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि वे अपनी पीढ़ियों को खुद ही गिनते रह जाएंगे।

क्या कहता है सऊदी का इतिहास

अब इस बात पर थोड़ा गौर करने की कोशिश करें तो पता चलता है कि अरेबियन इलाके में एक मर्द को वृध्द मृत्यु दर कम करने के लिए बच्चों को पैदा करने होते थे। जिसके लिए वे कई शादियां करते थे।

उस समय वहां कई लोग भटकते ही रहते थे और रेगिस्तान जैसी जगह में संसाधनों के अभाव में कम जिंदगी बिताना वाकई बेहद मुश्किल होता था।

वहां ऐसा माना जाता था कि अगर एक मां ने 10 बच्चों को जन्म दिया है तो उनमें से केवल 3 ही जिंदा रह पाएंगे।

उस वक्त में महिलाओं का बच्चा पैदा करने के दौरान मौत होना काफी आम बात होती थी।

दूसरी तरफ जब राजा अब्दुल अजीज ने एक जाति व जमीन पर जीत हासिल की थी। वह उस समय अलग अलग जातियों के बीच हो रहे युध्द पर विराम लगाना चाहते थे।

उन्होंने बेडाइन जाति से खासतौर से आग्रह किया कि वे एक साथ मिलकर रहें, जिसके बाद आपसी तनाव और झगड़े भी कम हो गए।

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