आखिर ऐसा क्या कहा था सद्दाम हुसैन ने की आखरी पेशी के दिन हंसने लगी थी कोर्ट की जनता ? - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

आखिर ऐसा क्या कहा था सद्दाम हुसैन ने की आखरी पेशी के दिन हंसने लगी थी कोर्ट की जनता ?

सद्दाम साहब की आखिरी पेशी को लेकर कुछ बातें जो शायद बाहर नहीं आई और उनके बारे में ही हम आपको यहां जानकारी देने जा रहे हैं। आपको बता दें कि अपनी पेशी के दौरान सद्दाम साहब हाथ में कुरान शरीफ लिए हाजिर हुए और सबसे आगे बैठ गए। इसके बाद जज जो कि इराकी था, ने उनसे कहा, आपको कुछ कहना है?

अदालत में जज को भी सुना गए सद्दाम साहब

सद्दाम साहब ने कहा, हां मुझे बहुत कुछ कहना है और जब मैं कुछ कहूं तो मुझे अपने भाई की तरह समझो अपने इराकी भाई की तरह और मैं यहां अब अपना बचाव नहीं करूंगा बल्कि मैं यहा आपका बचाव करूँगा।

सारे इराकी भाइयो का बचाव करूंगा। मैं जानता हूं आप पर अमेरिका का दबाव है लेकिन मैं आपसे फिर भी कहूंगा कि आप दिल से और हिम्मत से काम लो। सद्दाम साहब सर झुकाते हुए फिर बोलना शुरु करते हैं।

सद्दाम हुसैन का इस्लाम से खास लगाव

सद्दाम साहब ने कहा, कल मैंने आपसे तीन बार कहा कि नमाज का वक़्त हो रहा है नमाज का वक़्त हो रहा है मगर आपने अनसुना कर दिया।

जज उन्हें बीच में टोकते हुए कहता है,नही…नही, मैंने अनसुना नही किया, मैं अदालत की कार्यवाही कैसे रोक देता?

जज की बात पर सद्दाम साहब गुस्सा जाते हैं और कहते हैं, क्या, अल्लाह अपनी बंदगी के लिए अदालत की कार्यवाही खत्म होने का इंतज़ार करेगा?

इराकियों को याद दिलाया, इस्लाम का कानून

याद करो ये इराक का कानून है कि नमाज के वक़्त कोई भी सरकारी काम नही होगा और आज ये अमेरिकी इराकी भाइयो को समझा रहे है कि ये कानून सद्दाम का बनाया हुआ है। क्या तुम भूल गए कि इस्लाम ही इराक का कानून है?

अमेरीकियों के साथ जुड़ा अपनी जिंदगी का बताया किस्सा

अफ़सोस। तुम इन अमेरिकियो के बहकावे में आ गए। यह बोलने के बाद वह कुछ देर के लिए खामोश रहते हैं, फिर आगे बोलते हैं, तो बातो में नमी थी, मेरे हाथो में एक घड़ी हुआ करती थी जिसे मेरी बेटी ने मुझे दिया था इन अमेरिकियो ने उसे छिन लिया।

अपने आप को ताकतवर कहने वाले ये अमेरिकी मुझे और मेरे साथियो को जानवरों की तरह मारते है। इशारों में वह कहते हैं, इनको दीवार के सहारे खड़ा कर के बंदूक के कुंडो से मारते रहे जब तक कि ये बेहोश न हो गए। युसूफ को इतना मारा की इनके पैर की हड्डी बाहर निकल गयी।

ये समझते हैं ऐसा कर के इन्होंने सद्दाम को छोटा कर दिया बल्कि ये नहीं जानते की सद्दाम को बहुत बड़ा कर दिया है, बहुत बड़ा। और मैं ये किसी का दिल रखने के लिए नही कह रहा हूं बल्कि इसलिए कह रहा हूं ताकि आप इनके कायरता का अंदाजा लगा सको।

सद्दाम की इन बातों पर हंसने लगते हैं अदालत में मौजूद लोग

ये बात सद्दाम साहब के साथियों को पसंद नहीं आती और वो उनसे उलझ जाते है। सद्दाम साहब इस बात पर सभी को इशारे से चुप होकर बैठने के लिए कह देते हैं, आगे कहते है, युसूफ जंगल में जब शेर चलता है तो दरख़्त पे बैठा बंदर हंसता है तो शेर उसकी हंसी की परवाह नही करता।

माय लार्ड,मुझ पर इल्जाम है कि मैंने अपनी सदारत में एक खास जमात का खून बहाया है। मेरा खुदा जानता है कि उस हैवानियत से जितनी तकलीफ उनके अपनों को हुई उससे ज्यादा मुझे हुई।

मैं बस अब यही कहूंगा कि अगर मैं गुनहगार साबित हो जाऊं तो मुझे इराकी कानून के हिसाब से सजा दे दी जाए। मैं अब अपने आप को बेकसूर साबित नही कर सकता मेरा रब मुझे इसका अज्र देगा। मुझे फक्र है कि मैं 35 साल तक इराक का मुहाफिज रहा।

इसके बाद भी सद्दाम को सुना दी गई फांसी की सजा

इसके बाद जो देखने को मिला शायद उसकी सभी को उम्मीद थी, सद्दाम साहब को फांसी देने की तारीख सुना दी गयी।

इस दौरान सद्दाम साहब के साथियों ने फैसले को लेकर नारेबाजी भी की फिर खुद सद्दाम साहब ने अल्लाह हु अकबर कहा और दो बार फिलिस्तीन जिंदाबाद कहा।

जब सद्दाम साहब को फांसी दी जा रही थी तो उन्होंने नकाब पहनने से भी मना कर दिया था। कुरान की तिलावत की, हंसते हुए सिगरेट पी उनके चेहरे पर मौत का डर बिल्कुल नहीं था और फिर कलमा पढ़ते पढ़ते वे शहीद हो गए।

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