तबस्सुम अली एक ऐसी महिला जो अपना घर चलाने के लिए करती है ये काम और कहलाती है सुपरवुमन!

बड़े बड़े शहरो में आमतौर पर महिलाए आपको सडको पर गाडिया दौडाती नज़र आ जाएँगी जो एक तरह से आत्मनिर्भरता की निशानी है | महिलाओ का वाहन चलाना शहरो में आम बात है लेकिन यही चीज़ अगर ग्रामीण इलाके में दिखाई दे तो वो अचम्भित करती है | मिलिए तबस्सुम अली से जो मध्यप्रदेश की सडको में गाडी नही बल्कि ट्रक चलते नज़र आती है |

तबस्सुम अली को जो भी ट्रक चलाते देखता है वो पहले उसकी तारीफ करता है जिस वजह से वो सुपरवुमन कहलाने लगी है | लेकिन तबस्सुम के ट्रक चलाने की वजह है उनका परिवार जिसका पेट पालने के लिए वो ट्रक चलाती है |

क्यों चलाती है तबस्सुम अली ट्रक?

तबस्सुम बताती हैं, ‘हम छह बहन और एक भाई हैं। मां की किडनी खराब है, इसलिए उनका खास ख्याल रखना पड़ता है। पिता का पूरा समय मां का ख्याल रखने में ही निकल जाता है। ऐसे में परिवार का पेट पालने के लिए मुझे और मेरे भाई को काम करना पड़ता है। हम दोनों ही ट्रक चलाते हैं। हमारे पास दो ट्रक हैं, उसी से हमारे घर का चूल्हा जल रहा है। पिछले दाे सालों से ट्रक ड्राइविंग कर रही हूं।’

तबस्सुम है पहली महिला जो चलाती है इतना भारी वाहन

तबस्सुम बताती हैं, ‘मंडला आरटीओ ने मुझे बताया था कि मैं मप्र में पहली महिला हूं, जिसे हेवी व्हीकल का ड्राइविंग लाइसेंस मिला है। इस उपलब्धि से खुश भी हूं। महिला होने के कारण इस काम में शुरुआती दौर में कई चुनौतियां आई थीं, लेकिन उनसे निपटना भी अब सीख लिया है।’

देर रात असुरक्षा का डर लेकिन तबस्सुम उठाती है ये कदम

तबस्सुम कहती हैं, ‘यह सही है कि महिलाओं के लिए अब माहौल काफी असुरक्षित हो गया है। लेकिन इस माहौल का मेरे काम पर बुरा असर न पड़े इसलिए मैंने अपने व्यवहार में थोड़ा परिवर्तन किया है। कई बार मुझे कुछ दिनों के लिए ट्रक लेकर मंडला से बाहर जाना पड़ता है। ढाबे पर खाना खाना पड़ता है। इस दौरान मैं सामान्य लड़कियों की तरह कोई बात कहने में झिझकती नहीं हूं, डरती नहीं हूं इसलिए किसी की हिम्मत नहीं होती कि मुझे कोई छेड़ दे।’

सरकार कर चुकी है सम्मानित

तबस्सुम भाई-बहनों में तीसरे नंबर की हैं। वे बताती हैं, ‘शुरुआत में मेरे आसपास के लोगों को मेरा ट्रक चलाना थोड़ा अजीब लगा था, लेकिन अब वे मुझे शाबाशी देते हैं। सड़कों पर निकलती हूं तो लोग मुझे ट्रक चलाते हुए देख ठहर जाते हैं, तस्वीरें भी लेते हैं। ढाबे पर भी जाती हूं, तो आम ट्रक ड्राइवरों की तरह खाना खाती हूं। वहां भी मुझे प्रोत्साहन मिलता है। सरकार भी कई बार उन्हें सम्मानित कर चुकी है।’

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तबस्सुम पिछले दिनों महिला पंचायत में भाग लेने भोपाल गयी थी जहा उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुझाव दिया था की निर्भय टीम में महिला ड्राईवर नियुक्त किये जाए | इससे महिला पुलिस कर्मियों का काम और भी आसान होगा | इस पर सीएम ने आश्वासन दिया की वो ये कदम ज़रूर उठाएंगे |

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https://www.bhaskar.com/news/c-58-2570882-NOR.html

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