आखिर क्यों सेना के जवान होंठ के ऊपर काली पट्टी बांधते हैं ? आज ज्ञान बढ़ा लीजिये

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जब भी कही भारतीय सेना की बात चलती हैं तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.

भारतीय सेना का हर जवान अपने-आप में एक पूरी आर्मी होता हैं, लेकिन जब भी भारतीय सेना की एक ख़ास रेजिमेंट की बात आती है तो उसका नाम सुनने भर से ही दुश्मन देश के छक्के छूट जाते हैं.

गोरखा रेजिमेंट का नाम सुनते ही दुश्मन की पैंट हो जाती हैं गीली

जी हाँ हम बात कर रहे हैं भारतीय सेना के “गोरखा रेजिमेंट” की.

दिलेरी और बहादुरी का दूसरा नाम कहे जाना वाले इस रेजिमेंट की एक खासियत है कि वो अपने दुश्मनों पर इतने सख्त होते हैं कि उन्हें अपने सामने देखकर खुद दुश्मन भी अपनी मौत की भीख मानते हैं.

ऐसे में आज हम भारतीय सेना के इसी गोरखा रेजिमेंट की एक ऐसी दिलचस्प खासियत आपको बताने जा रहे हैं जिसपर शायद आपकी नज़र पहले कभी नहीं गई होगी.

अगर कभी इस बात पर आपने गौर भी किया होगा तो यकीनन आपको इसका जवाब नहीं मिला होगा.

अपने होंठ के नीचे इसलिए स्ट्रिप बांधते हैं भारतीय सैनिक

दोस्तों कभी आपने गोरखा रेजिमेंट के किसी जवान को देखा होगा तो आपने पाया होगा कि उनकी वर्दी में एक ऐसी अलग बात है जो और किसी में नहीं देखी गयी है और वो ये कि गोरखा रेजिमेंट अपने हैट की स्ट्रिप अपने निचले होंठ के नीचे दबाती है.

जबकि अगर दूसरी भारतीय सेना की रेजिमेंट इसके विपरीत उस स्ट्रिप को गले के नीचे पहनती है.

ऐसे में अगर इसे देखकर आप भी सोचते हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है?

तो बता दें कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं जो की काफी रोचक भी है. तो आइये बताते हैं वो तीन ख़ास कारण.

पहला कारण: गोरखा रेजिमेंट के सैनिकों का छोटा कद  

ये बात सुनने में अजीब लगे लेकिन ये कारण अहम कारणों में से एक है.

माना जाता हैं कि पहाड़ी राज्य से आने की वजह से गोरखा सैनिकों का कद थोड़ा छोटा होता है.

इसलिए गोरखा सैनिकों को दुसरे सैनिकों के बराबर दिखाने के लिए भी टोपी की स्ट्रिप को होठों के नीचे लगाते हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि इस रेजिमेंट की कैप और स्ट्रिप का आकार के सैनिक के लिए बदला नहीं जाता है और गोरखा परंपरा के रूप में ही छोटा रखा जाता है.

दूसरा कारण: गोरखा सैनिक होते हैं बातूनी

ये कारण थोड़ा हास्यास्पद लग सकता हैं लेकिन ये देखा गया हैं कि गोरखा रेजिमेंट के सैनिक बातूनी होते हैं इसलिए भी उनकी टोपी की स्ट्रिप उनके निचले होंठ के नीचे से हो कर निकाली जाती है.

ऐसा इसलिए ताकि वो सैनिक ज्यादा बात न कर सके.

बताया जाता है कि पहले युद्ध के दौरान वे तेज आवाज में चिल्लाते हुए दुश्मन पर हमला करते थे.

ऐसा करने से होता ये था कि दुश्मनों को इससे हमले की चेतावनी मिल जाया करती थी.

इसी समस्या से निपटने के लिए कैप की स्ट्रिप की लंबाई को कम रखा गया, ताकि उनका मुंह बंद रह सके.

तीसरा कारण: सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए

तीसरी वजह बेहद महत्वपूर्ण है जिसके चलते गोरखा सैनिकों की स्ट्रिप उनके होंठ के नीचे होती है.

कहा जाता हैं कि कैप का स्ट्रिप ठोड़ी के नीचे पहने जाने से पीछे से हमला करने वाले दुश्मन से बचाव करने में मदद मिलती है.

क्योंकि अगर स्ट्रिप गले में डाली जायेगी तो ऐसा करने से संभावना बढ़ जाती हैं कि दुश्मन हमरे सैनिकों का गला घोंटने में कामयाब हो सके.

हालांकि, इन सैनिकों के पट्टा निचले होंठ के नीचे पहने से दुश्मनों के हमले को काफी कम किया जा सकता है.

निष्कर्ष

तो दोस्तों अगली बार आप जब भी गोरखा सैनिकों के टोपी का पट्टा निचले होंठ के नीचे लगा देखें तो हैरात में पड़ने की जगह इन वजहों के बारे में सोच लेना.


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