भुला दिया गया इस महान मुस्लिम क्रांतिकारी को

भगत सिंह, महात्मा गाँधी, मंगल पाण्डेय जैसे महान क्रांतिकारी लोगो की कहानी पढ़ के बड़े हुए हम लोग शायद इससे आगे कभी बढ़े ही नही या कुछ कहानिया ऐसी थी जिन्हें लोगो तक पहुचाया ही नही गया | आज़ादी की लड़ाई में कुछ नाम ऐसे थे जिन्हें बिना आवाज़ किये दफ्न कर दिया गया क्योकि वो डरते थे ऐसे क्रांतिकारी से |

जिन नामो को सबके सामने आने से अंग्रेजी हुकुमत ने रोका था उनमे से एक नाम था शेर अली अफरीदी का जिन्होंने अंग्रेजो के दो आला अफसरों को मौत के घाट उतरा था |

शेर अली की कहानी इतनी दिलचस्प है की मानो आपके आगे हॉलीवुड की जेम्स बॉड की फिल्म चल रही हो | शेर अली एक ऐसा क्रांतिकारी था जिसको फांसी देने के बाद अंग्रेजो में खौफ फ़ैल गया था और वो भारत छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके थे |

कौन था शेर अली अफरीदी जिसने अंग्रेजो को चटाई थी धूल?

शेर अली अफरीदी एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिनका मुश्किल से ही इतिहास की किताबो में ज़िक्र किया गया हो या क्रांतिकारियों की लिस्ट में उन्हें जगह मिली हो | लेकिन वो एक ऐसे देशभक्त थे जिन्होंने बिना किसी आन्दोलन आदि में भाग लिए एक ऐसे अंग्रेजी अफसर को मारा था जिसे मारने के लिए बड़े बड़े योद्धा असफल थे |

असल में उन्होंने अंग्रेज गवर्नर जनरल लोर्ड मेयो की हत्या की थी वो भी बिना किसी के सहायता की | उस समय गवर्नर का पद आज के प्रधानमंत्री जितना था, तो आप अंदाजा लगा लीजिये की सुरक्षा कितनी कड़ी रही होगी |

अंग्रेजी शासन में पहले कर्मचारी थे शेर अली

शेर अली शुरुआत में एक साधारण से कर्मचारी थे जो पेशावर के अंग्रेजी कमिश्नर के ऑफिस में काम करते थे | काम करने के दौरान उन्हें अंग्रेजी हुकुमत से कोई दिक्कत नही थी और वो इसे लेकर कुछ बुरा नही सोचते थे | लेकिन फिर एक ऐसी घटना हुई की उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गयी |

शेर अली को दी गयी थी उम्रकैद की सजा

जिस बदलाव की बात हम इतनी देर से कर रहे है वो असल में हुआ ये था की एक झगड़े के दौरान हुए कत्ल पे शेर अली को फसाया गया | शेर अली कोर्ट में खुद को बेगुनाह साबित करने की भरपूर कोशिश करते रहे लेकिन उन दिनों रंगभेद के चलते हिन्दुस्तानियों को ही सजा दी जाती थी |

शेर अली को उम्र कैद की सजा मिली, अंग्रेजो ने बिना उनकी बात सुने सन 1867 में उन्हें काला पानी की सजा काटने अंडमान निकोबार भेज दिया |

फिर शुरू हुआ शेर अली का क्रांतिकारी बनने का सफ़र

शेर अली के अंडमान निकोबार पहुचते ही उनकी मुलाक़ात वह के अन्य कैदियों से होती है जो की सब क्रन्तिकारी थे | यहा से शेर अली के मन में क्रन्तिकारी की विचारधारा फूटने लगी | उन दिनों छोटे से छोटे अंग्रेजी सैनिको को किसी भी अपराध की कोई ख़ास सजा नही दी जाती थी लेकिन भारतीयों को सीधे काला पानी की सजा मिलती थी जहा वे तिल तिल कर मरने के लिए मजबूर होते थे | शेर अली ने ठान लिया था की वो दो अफसरों को मारेंगे, पहला उनका सुप्रिडेंटेंट और दूसरा अंग्रेजी राज के गवर्नर |

शेर अली का व्यवहार अच्छा होने के कारण उन्हें 1871 में पोर्ट ब्लेयर पर नाई का काम करने की इजाजत दे दी गई | यह एक ऐसी जेल थी जहा सब कुछ खुला था क्योकि चारो और समुद्र होने के कारण कोई कहीं भी नही भाग के जा सकता था | फिर एक ऐसा दिन आया जब शेर अली को अपना मकसद पूरा करने का मौका मिला |

एक दिन गवर्नर ने जेल का दौरा करने का फैसला किया

फिर आया एक ऐसा दिन जब शेर अली को अपना मकसद पूरा करने का मौका मिला | लेकिन चुनौती थी उनके सुरक्षाकर्मी | गवर्नर लोर्ड मेयो ने अचानक जेल का दौरा करने का फैसला किया वो जेल में आ धमके और कैदियों का हाल चाल जानने लगे उनका कोर सिक्योरिटी दस्ता जिसमें 12 सिक्योरिटी ऑफिसर शामिल थे, वो भी साथ साथ चल रहे थे।

शेर अली ने गवर्नर को उतारा मौत के घाट

शेर अली खुद अंग्रेजो के सिक्योरिटी दस्ते का सदस्य रह चुके थे जिसके कारण वो जानते थे की सिक्यूरिटी वाले कहा चूक करते है | हथियार अली के पास नही था जिसके बदले उन्होंने उस्तरे को ही अपना हथियार बनाया | शेर अली उस वक़्त का इंतज़ार करने लगा जब सिक्यूरिटी गार्ड सुरक्षा में ढील बरतते है |

गवर्नर जेल का दौरा करने के बाद गवर्नर समुद्री बोट की तरफ बढ़ा और तभी उनका सिक्योरिटी दस्ता थोडा बेफिक्र हुआ इस सोच में की ‘चलो पूरा दिन ठीक ठाक निकला’ |

पोर्ट पे अँधेरा था और तभी शेर अली ने इस बात का फायदा उठाया | शेर अली को यह मौक़ा आने वाले कई सालो तक नही मिलना था इसलिए उसने पूरे जोश के साथ गवर्नर की तरफ बढ़ा | शेर अली एक बिजली के साए की तरह गवर्नर की तरफ बढ़ा और जब तक बाकी गार्ड कुछ समझ पाते पूरी बोट खून से लथपथ हो चुकी थी |

जब शेर ने कहा ‘मैंने अल्लाह की मर्जी पूरी की है’

गवर्नर की मौत के बाद शेर अली को तुरंत पकड़ लिया गया | लेकिन हत्या की बात लंदन तक पहुच गयी और सभी अंग्रेजो में दहशत फ़ैल गयी | शेर अली अफरीदी से जमकर पूछताछ की गयी, उन्हें टार्चर किया गया |

लेकिन बदले में अली सिर्फ एक ही बात कहते थे  “ मुझे अल्लाह ने ऐसा करने का हुक्म दिया है, मैंने अल्लाह की मर्जी पूरी की है ”। अंग्रेजो में डर का माहौल बन गया और वो ये समझने लगे की अब हिन्दुस्तान में कोई भी अंग्रेज सुरक्षित नही है |

बाद में शेर अली को फ़ासी दे दी गयी

जेल में उसकी सेल के साथियों से भी पूछताछ की गई, एक कैदी ने बताया कि शेर अली अफरीदी कहता था कि अंग्रेज देश से तभी भागेंगे जब उनके सबसे बड़े अधिकारी को मारा जाएगा और गवर्नर वायसराय ही सबसे बड़ा अंग्रेज अधिकारी था। उसकी हत्या के बाद वाकई अंग्रेज बहुत खौफ में आ गए थे । इसीलिए उन्होंने इस खबर को जायदा फैलने नही दीया और शेर अली अफरीदी को चुपचाप फांसी पर लटका दिया गया।

देखिये वीडियो:-

 

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