शहाबुद्दीन को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को दिया करारा झटका,पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को भेजा नोटिस

मोहम्मद शहाबुद्दीन बिहार की राजनीति के एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके दबदबा पूरे प्रदेश में है। हालाँकि अपने दबंगई कार्यप्रणाली और कई आपराधिक मामलों में दोषी पाए जाने के बाद शहाबुद्दीन जेल में बंद हैं।  लेकिन प्रदेश में आज भी उनका बोलबाला है और लोग भी उन्हें बहुत पसंद करते हैं। हाल ही में पटना हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया है।  जिसके जवाब में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

1. 45 से भी ज़्यादा मामले हैं दर्ज

आजकल तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन को खिलाफ 45 से भी ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। बिहार के सीवान इलाके से सांसद रह चुके शहाबुद्दीन के बारे में कहा जाता है कि सीवान में उनका ही कानून चला करता था। जो शहाबुद्दीन कहते हैं  वही सीवान का कानून बन जाता था।

2.  सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

पटना हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया है जिसके जवाब में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट में पटना हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है।  जिसमें उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस भेज जारी किया है।

3. तेजाब काँड मामले पहुँचाया था तिहाड़ जेल

सीवान के बहुचर्चित तेज़ाब कांड ने शाहबुद्दीन को तिहाड़ जेल की दीवारों में कैद करवा दिया। इस कांड में अपने तीनों बेटों को गँवा चुके चंद्रकेश्वर प्रशाद उर्फ़ चंदा बाबू और पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड के बाद उनकी पत्नी आशा रंजन के भरसक प्रयासों के बाद ये मुमकिन हो पाया।

4. तिहाड़ जेल में ही रहेंगे शहाबुद्दीन

याचियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि मामले में दोषी मोहम्मद शाहबुद्दीन को तिहाड़ जेल में रखा जाए। याचिकाकर्ता की अपील और दिये गये तर्कों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील मंजूर कर शाहबुद्दीन को तिहाड़ जेल में रखने का आदेश जारी कर दिया था।

निष्कर्ष:

चाहे सहाबुद्दीन आज जेल बंद हैं और विपक्ष में बैठी पार्टी के नेता हैं लेकिन आने वाले लोकसभा चुनाव में वो अहम भूमिका निभा सकते हैं। कहा जाता है कि सीवान से शुरुआत कर पूरे बिहार की राजनीति पर छाए शाहबुद्दीन के नाम का सिक्का आज भी चलता है। आज भी राजनीति में उनके इशारों पर बड़े बड़े दांवपेच लड़ाये जाते हैं। जिनका नतीजा बिलकुल सटीक निकलता है।

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